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मोदी सरकार 2022 तक ऐसे पूरा करेगी सबको घर देने का वादा, गांवों पर है सबसे ज्यादा फोकस

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साल 2022 तक हर परिवार के पास अपना घर हो ऐसा मोदी सरकार का लक्ष्य है. दरअसल इसे पूरा करने के लिए सरकार ने न सिर्फ काम तेज कर दिया है, बल्कि आवास एप के जरिये निगरानी भी बढ़ा दी है. जी हां, बता दें कि बीजेपी को चुनाव में प्रधानमंत्री आवास योजना का काफी फायदा मिला है.

खास बात यह है कि इस योजना के मुरीद हिंदू भी हैं और मुस्लिम भी. आंकड़ो के अनुसार गांव और शहर मिलाकर गरीबों के लिए अब तक 1 करोड़, 7 लाख घरों का निर्माण पूरा करवा लिया गया है.

बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में 81 लाख से अधिक तो शहरों में 26 लाख मकान गरीबों के लिए बन गए हैं, जिनमें अधिकांश में लाभार्थियों को शिफ्ट कर दिया गया है. दरअसल सरकार का जोर ग्रामीण क्षेत्रों पर है क्योंकि यहां सबसे ज्यादा गरीब हैं और इसीलिए उनके लिए घर बनाने का टारगेट भी बड़ा है. मालूम हो कि गांवों के लिए अब तक करीब 99 लाख मकानों की स्वीकृति दी जा चुकी है.

दरअसल ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सांसद निहालचंद के सवाल पर लोकसभा में बताया कि “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत 2.95 करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य रखा गया है. सामाजिक-आर्थिक, जाति आधारित जनगणना 2011 के डाटा के सत्यापन के बाद 20 जून तक देश में घर के लिए 2.53 करोड़ लाभार्थी तय किए गए हैं. इन्हें 2021-22 तक सहायता मिल जाएगी.”

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दरअसल आवास योजना के तहत गांवों के बेघरों को 1.20 लाख रुपये, शौचालय के लिए 12 हजार और घर बनवाने के लिए 15 हजार रुपये मजदूरी का पैसा मिलता है. आपको याद हो कि इस योजना की शुरुआत 25 जून 2015 को की गई थी.

किस प्रकार पूरा होगा लक्ष्य

मालूम हो कि सभी राज्यों ने पीएमएवाई-जी का अलग बैंक खाता (यानी कि स्टेट नोडल अकाउंट) खोल दिया है. दरअसल इसके तहत लाभार्थियों के अकाउंट में डायरेक्ट पैसा भेजा जा रहा है.

बता दें कि इस योजना के तहत बनने वाले घर के निर्माण के हर चरण पर मोबाइल अप्लीकेशन आवास एप के जरिये नजर रखी जा रही है.

दरअसल सबसे अच्छा काम करने वाले राज्यों को पुरस्कार दिया जा रहा है ताकि काम तेजी से और गुणवत्ता वाला हो.

जानिए किसे मिलेगा लाभ

बता दें कि इस योजना के तहत लाभार्थियों का सेलेक्शन सामाजिक-आर्थिक, जाति आधारित जनगणना 2011 के अनुसार हुआ है. मालूम हो कि वो सभी ग्रामीण परिवार जो आवास विहीन हैं, भूमिहीन हैं, एक या दो कमरे वाले कच्चे मकान में रहते हैं, उन्हें पक्के मकान के लिए सहायता मिलेगी.

बता दें कि इसके तहत मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 15,18,001 मकान सेंक्शन किए गए हैं. वहीं दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है जहां के लिए 13,92,984 मकान बनाने का निर्णय लिया गया है. तीसरे नंबर की बात करें तो इस स्थान पर यूपी है जहां 12,78,115 मकान बनाए जाएंगे.

प्रस्ताव आया तो बढ़ सकता है मकान बनाने का टारगेट

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत 26 लाख मकानों का निर्माण पूर्ण करके उनका कब्जा ले लिया गया है, जबकि 47.5 लाख का निर्माण विभिन्न चरणों में होना है. मालूम हो कि कुल 81 लाख मकानों बनाने की मंजूरी दी गई है. दरअसल सरकार ने शहरी क्षेत्र में गरीबों के आवास के लिए एक सर्वे करवाया है जिससे पता चला है कि शहरों में लगभग 1 करोड़ मकानों की मांग है.

दरअसल शहरी क्षेत्र में गरीबों के घर बनाने के लिए अब तक सरकार 51,113 करोड़ रुपये की सहायता दे चुकी है. बता दें कि केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने कहा है कि साल 2020 में सरकार राज्यों से प्रस्ताव आने पर गरीबों के लिए घर बनाने का टारगेट बढ़ा सकती है. बता दें कि शहरी गरीबों को 2.5 लाख, शौचालय के लिए 20 हजार रुपये और मजदूरी का पैसा मिलता है.

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