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भारतीय रेल में होती है सबसे अधिक बिजली की खपत, एक दिन में हो जाती है 5.60 करोड़ यूनिट खर्च

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जब ऊर्जा के उपयोग की बात आती है तो बता दें कि एक आंकड़े के अनुसार भारतीय रेलवे प्रतिदिन लगभग 560 लाख यूनिट उर्जा का उपयोग करती है। जी हां, दरअसल भारतीय रेलमंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि रेलवे पर्यावरण अनुकूल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दे रही है।

बता दें कि रेलवे ने अक्षय ऊर्जा का उपयोग करने के लिए लगभग 1000 मेगा वाट सौर ऊर्जा और 200 मेगावाट पवन ऊर्जा के स्रोत की योजना बनाई है। दरअसल इसके साथ ही रेलवे अपने कार्बन फुटप्रिंट्स को कम करने के लिए ऐसे उपायों पर गौर कर रही है जो ऊर्जा का दक्षता के साथ प्रयोग करें।

बोले रेलमंत्री- इन उपायों के जरिए भारतीय रेल अपना कार्बन फुटप्रिंट कम करेगी

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव, मेनलाइन इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट्स (मेमू), इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट्स (ईएमयू) के लिए पुनर्योजित सुविधाओं के साथ ऊर्जा कुशल 3-फेज प्रौद्योगिकी का उपयोग, बेहतर ऊर्जा दक्षता के लिए ट्रेन सेट।

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वहीं पॉवर कारों में डीजल ईंधन की खपत को कम करने के लिए गाडि़यों में हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) प्रणाली को शुरू करना।

इसके अलावा बिजली की खपत में कमी के लिए रेलवे स्टेशनों, सेवा भवनों, आवासीय क्वार्टरों और कोचों सहित सभी रेलवे प्रतिष्ठानों में ऊर्जा कुशल लाइट एमिटिंग डायोड प्रकाश का प्रावधान करना।

बता दें कि खपत प्‍वाइंटों पर नियमित ऊर्जा ऑडिट करना। दरअसल उत्पादन इकाइयों और कारखानों में ऊर्जा दक्षता अध्ययन किए गए थे और 15% तक ऊर्जा दक्षता सुधार हासिल किया था। बता दें कि इसमें महत्वपूर्ण ऊर्जा बचत की पहचान, एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, संभावित प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ताओं की पहचान, जो इकाइयों को ऊर्जा की बचत करने वाली प्रौद्योगिकियों की पेशकश कर सकते हैं आदि जैसी गतिविधियां शामिल थीं।

इतना ही नहीं, इसके अलावा 5 स्टार रेटेड बिजली के उपकरणों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

मालूम हो कि कॉस्टिंग के उपयोग के लिए लोको पायलटों का नियमित प्रशिक्षण, पुनर्योजित ब्रेकिंग सुविधाओं और बिजली रेलइंजनों का ब्लोअर बंद करना यदि यार्ड में 50 मिनट से अधिक की रूकौनी होती है।

दरअसल इसी प्रकार, यदि संभावित रूकौनी 30 मिनट से अधिक होती है तब डीजल लोको को भी बंद कर दिया जाता है और इसके परिणामस्वरूप ग्रीन हाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन में कमी आती है।

आपको बता दें कि खाली मालगाड़ियों को ले जा रही मल्टी यूनिट (एमयू) के पीछे जुड़े लोकोमोटिव को ऊर्जा बचाने के लिए बंद कर दिया जाता है। द्रसे ड्रेस्ड सभी इलेक्ट्रिक रेलइंजनों में दिए गए माइक्रोप्रोसेसर आधारित ऊर्जा मीटरों के माध्यम से विद्युत रेलइंजनों की ऊर्जा खपत की नियमित रूप से निगरानी की जाती है और औसत ऊर्जा खपत के आधार पर बेंचमार्किंग की जाती है।

मालूम हो कि डीजल लोकोमोटिव चालकों की यात्रा राशन के संबंध में ईंधन की खपत की निगरानी करना।

दरअसल कपको लोकोमोटिव के निष्क्रिय होने पर ईंधन की खपत को कम करने के लिए 986 डीजल रेलइंजनों में सहायक विद्युत इकाई (एपीयू) मुहैया कराई गई है।

मालूम हो कि रिमोट मॉनिटरिंग के जरिए डीजल रेलइंजनों की निष्क्रियता की निगरानी और लोकोमोटिव तथा गाड़ी प्रबंधन की जा रही है । बता दें कि इस समय 2606 लोकोमोटिव रैमलोट से लैस हैं।

दरअसल डेमू में 20% कंप्रेस्‍ड नेचुरल गैस (सीएनजी) प्रतिस्थापन – सीएनजी के उपयोग से तरल ईंधन की तुलना में कम जीएचजी का उत्सर्जन होता है।

आपको बता दें कि भारतीय रेलवे को दुनिया का एकमात्र रेलवे होने का गौरव प्राप्त है जो यात्री परिवहन के लिए सीएनजी से चलने वाली पावर कारों का उपयोग करती है।

बता रहे भारतीय रेलवे ने डेमू ड्राइविंग पावर कार (यानी कि डीपीसी) को सीएनजी के साथ डुअल फ्यूल मोड में बदलना शुरू कर दिया है। दरअसल 25 अदद डीपीसी को बदल दिया गया है और वे परिचालन में हैं।

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