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अब बदलने जा रहा है आपका बिजली का मीटर, जितने का कराओगे रिचार्ज उतनी मिलेगी बिजली

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अब देश में जल्द ही स्मार्टमीटर लगेंगे। जी हां, दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली मोदी सरकार 2.0 का देश भर में 30 करोड़ स्मार्टमीटर लगाने का प्लान है। बता दें कि सरकार बिजली चोरी रोकने के उद्देश्य से 3 साल में देश के घर-घर में मीटर बदलने की योजना पर काम कर रही है।

मालूम हो कि इस मीटर की खासियत यह होगी कि इन्हें पहले रिचार्ज कराना होगा। जी हां, दरअसल इससे जहां बिजली की चोरी की बंद हो जाएगी और ईमानदार लोगों को 24 घंटे बिजली की सप्लाई भी सुनिश्चित होगी।

कॉस्ट पर सब्सिडी दे सकती है सरकार

मालूम हो कि ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए बिजली मंत्रालय ने स्मार्ट मीटर की सप्लाई के लिए मैन्युफैक्चरर्स के साथ चर्चा करनी शुरू कर दी है, जिससे निगरानी में सुधार होगा। आपको बता दें कि इस योजना के मुताबिक सरकार मीटर की कॉस्ट पर सब्सिडी देने की योजना भी बना रही है।

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2 हजार रु हो सकती है कीमत

आपको बता दें कि शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, सरकार स्मार्टमीटर पर 2,000 रुपए प्रति पीस कॉस्ट आएगी। दरअसल इससे पहले 2017 में दिए गए 50 लाख मीटर के ऑर्डर पर प्रति पीस 2,503 रुपए कॉस्ट आई थी। हालांकि इस बार बड़ा ऑर्डर होने के कारण कॉस्ट कम आने की उम्मीद है। बता दें कि बिजली मंत्रालय से इस पर कोई टिप्पणी नहीं मिल सकी है।

डिस्कॉम्स के बदलेंगे दिन

मालूम हो कि बिजली मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, सभी मीटर को प्री-पेड कर देने से बिजली वितरण कंपनियों की लागत काफी कम हो जाएगी और डिस्कॉम आसानी से घाटे से उबर जाएंगी। दरअसल आपको बता दें कि अभी देश के कई राज्यों की डिस्कॉम भारी घाटे में चल रही है। इस कारण डिस्कॉम के पास बिजली खरीदने के लिए पैसे नहीं होते हैं।

बिजली क्षेत्र में क्रांति आने की संभावना

दरअसल बिजली मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि मीटर को स्मार्ट प्री-पेड बना देने से बिजली क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी। मालूम हो कि सरकार के इस फैसले से कम आय के उपभोक्ताओं को अधिक फायदे की उम्मीद है। हालांकि, नोएडा के औद्योगिक इलाके में पहले से प्री-पेड मीटर का चलन है, लेकिन घरेलू इस्तेमाल के लिए अभी देश के काफी कम इलाके में प्री-पेड मीटर है।

ये फायदे होंगे

मालूम हो कि बिजली मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक स्‍मार्ट मीटरों की ओर उठाया जा रहा यह कदम गरीबों के अनुकूल कदम है। दरअसल ऐसा इसलिए क्‍योंकि उपभोक्‍ताओं को एक ही बार में पूरे महीने के बिल की अदायगी नहीं करनी पड़ेगी। दरअसल उपभोक्‍ता इसके बजाय अपनी जरूरतों के हिसाब से भुगतान कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि उपभोक्ता अपनी जरूरतों के मुताबिक वे अपने मीटर में पैसे डलवाएंगे और उसके मुताबिक बिजली खर्च करेंगे। इससे कम आय वालों के पैसे बचने के साथ बिजली के फालतू खर्च भी नहीं होंगे जिससे बिजली की बचत होगी।

रोजगार में होगी बढ़ोतरी

आपको बता दें कि बिजली मंत्रालय का यह मानना है कि स्‍मार्ट प्रीपेड मीटरों का निर्माण करने से युवाओं के लिए कौशलपूर्ण रोजगार भी पैदा होंगे। इसके अलावा स्मार्ट मीटरों के आने से बिजली के बिल जेनरेट नहीं करने पड़ेंगे जिससे कागज की बचत होगी। बता दें कि अभी बिजली के बिल देने से पहले मीटर रिडिंग के लिए डिस्कॉम को अपने कर्मचारी भेजने पड़ते हैं। दरअसल प्रीपेड मीटर लग जाने पर इन चीजों पर होने वाले खर्च बचेंगे।

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