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किसानों के लिए मोदी सरकार ने बनाया ये खास तरह का बड़ा प्लान, आगामी बजट में हो सकता है ये ऐलान

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देश में कृषि संकट से कैसे निपटा जाए इसके लिए नरेंद्र मोदी सरकार एक खास योजना पर काम कर रही है. जी हां, दरअसल इसके लिए मोदी सरकार किसानों से उत्पाद एकत्र करने के लिए होम डिलीवरी स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने, 10,000 किसान उत्पादक संगठन बनाने और अन्य लोगों के साथ हाईवे पर नेशनल वेयरहाउसिंग नेटवर्क का निर्माण करना शामिल है.

आपको बता दें कि इस प्लान में से कुछ की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी 5 जुलाई को 2019-20 के लिए पेश होने वाले यूनियन बजट में कर सकती हैं. इसके साथ ही किसानों द्वारा डायरेक्ट मार्केटिंग के लिए एक मोबाइल ऐप आधारित सिस्टम बनाना, मछली और एक्वेटिक फार्मिंग के लिए एक अलग फंड, कृषि उपज के लिए विलेज स्टोरेज स्कीम और सौर फार्मिंग के लिए गांव की असिंचित जमीन का उपयोग करने के लिए विशेष योजना शामिल है.

मालूम हो कि केंद्र की मोदी सरकार चाहती है कि भारत के ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अगले 5 वर्षों में 25 लाख करोड़ रुपये के निवेश हो और वो ऐसा करने के तरीकों पर भी विचार कर रहा है. इसमें सरकार और प्राइवेट सेक्टर दोनों साथ मिलकर निवेश करेंगे. 5 जुलाई को नई सरकार के पहले बजट में इनमें से कुछ को प्रतिबिंबित किया जाएगा.

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यही नहीं, इसके साथ ही किसानों को मौसम, कीमतों और अन्य पहलुओं के बारे में जानकारी मिल सके. इसके लिए नई पॉलिसी में बिग डाटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्लॉक चेन टेक्नोलॉजी के व्यापक उपयोग पर ध्यान दिया जाएगा.

दरअसल किसानों पर किराये पर और उपयोग के आधार पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिए एक स्पेशल मोबाइल ऐप आधिरत प्रणानी बनाई जाने की संभावना है. बता दें कि यह प्रणाली विभिन्न कृषि उत्पादों के मौसम और बाजार की कीमतों पर वास्तविक समय की जानकारी भी देगी. दरअसल आगामी बजट ऐसी प्रणालियों को विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन का प्रस्ताव दे सकता है.

आपको बता दें कि भारतीय एग्रीकल्चर को मानसून पर निर्भर कम करने के वास्ते सरकार 1 करोड़ हेक्टेयर जमीन को माइक्रो-इरिगेशन के तहत जोड़ना चाहती है. जी हां, दरअसल भारत में बुवाई क्षेत्र का करीब 60% हिस्सा में सिंचाई कवर नहीं है, जिससे फार्म सेक्टर मौसम की मार से उजागर हो रहा है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फर्टिगेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें ड्रिप या स्प्रे सिंचाई प्रणाली के जरिए पानी के साथ उर्वरक को मिलाकर पौधों तक पहुंचाया जाता है. दरअसल यह फर्टिलाइजर के उपयोग को 70-90% तक कम सकता है. वहीं पानी के उपयोग में 20% की कटौती कर सकते हैं और पर्यावरण प्रदूषण को कम सकते हैं.

मालूम हो कि यह मिट्टी के बहाव को भी कम करता है और इसके अलावा मिट्टी से होने वाले रोगों से बचाने के साथ जड़ से उखड़ने वाले जोखिम को कम करता है. इसके अलावा पानी की कम खपत, उपयोग की जाने वाली फर्टिलाइजर की मात्रा में कमी आती है. जी हां, दरअसल इससे पौधे ज्यादा पोषक तत्व ग्रहण करते हैं और फर्टिलाइजर के सही समय और मात्रा को नियंत्रित करता है.

दरअसल प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत इस प्रोजेक्ट को लागू किया जाएगा. जबकि इस योजना के तहत 31 लंबे समय से लंबित सिंचाई प्रोजेक्ट्स को पूरा किया गया है. बता दें कि सरकार का इरादा अगले कुछ महीनों में बाकी बचे 68 प्रोजेक्ट्स पर काम पूरा करने का है.

पिछले दो सालों में, किसानों बेहतर कीमतों और ऋण माफी की मांग को लेकर कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं. लो रिटेल प्राइस ग्राहकों के लिए तो अच्छा है, लेकिन लगातार खाद्य पदार्थों की कम कीमत का मतलब है कि किसानों की इनकम सपाट रही है.

मालूम हो कि जुलाई 2018 में केंद्र ने 14 ग्रीष्मकालीन खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी कि MSP में बढ़ोतरी की घोषणा की थी. बता दें कि सरकार ने खेती की लागत का कम से कम 1.5 गुना एमएसपी निर्धारित किया था. वहीं आपको यह भी बता दें कि 2014-19 में नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है.

दरअसल किसानों की आय दोगुनी करने के अपने वादे को निभाने के लिए सरकार प्रयासरत है. बता दें कि सरकार एक ऐसी प्रणाली पर काम कर रही है जिससे हजारों किसान अपनी सब्जियां, फल, डेयरी और फिशरी प्रोडक्ट्स सीधे शहरों में घरों में बेच सकें. वैसे एग्रीकल्चर की नीतियों पर यह विचार भी केंद्रित होगा कि किसानों के लिए तकनीक का कैसे इस्तेमाल हो और उनके करीब बाजार लाने के लिए रेग्युलेशन को कैसे कम करें.

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