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मोदी सरकार की इस स्कीम का अब तक चार करोड़ लोग उठा चुके हैं फायदा, कहीं आप छूट तो नहीं गए

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नरेंद्र मोदी सरकार ने दुबारा सत्ता में आते ही साफ कर दिया कि इस बार सरकार की मंशा खासतौर पर किसानों के संबंध में क्या है. आपको बता दें की किसानों से जुड़ी सबसे प्रमुख योजनाओं में से एक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम का अब तक देश के 4 करोड़ से अधिक किसान लाभ उठा चुके हैं.

दरअसल उन्हें चार-चार हजार रुपये मिल चुके हैं. लेकिन 8.5 करोड़ किसानों को अब भी इस स्कीम का लाभ मिलने का इंतजार है. बता दें कि यूपी के सबसे ज्यादा करीब सवा करोड़ किसानों ने इसका फायादा लिया है. बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस शासित कई प्रदेश भी इसका अच्छा फायदा उठा रहे हैं. वहीं गैर कांग्रेसी और गैर भाजपा शासित राज्यों ने भी इसका लाभ लेने में खूब दिलचस्पी दिखाई है.

आपको बता दें कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक जेडीएस-कांग्रेस शासित कर्नाटक में 7,66,385 किसानों को पैसा मिल चुका है. वहीं पंजाब के 13,36,055 किसान लाभान्वित हो चुके हैं. हालांकि कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश में काफी कम रकम पहुंची है. जी हां, दरअसल 26 जून तक की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में सिर्फ 12,888 किसानों को फायदा मिला है.

इसके अलावा बिहार के 8,75,116, छत्तीसगढ़ के 4,37,012, और उत्तराखंड के 4,29,715 किसानों को लाभ मिला है. वहीं खट्टर सरकार हरियाणा के 11,50,159 किसानों तक लाभ दिलाने में कामयाब रही. यही नहीं, यहां तक कि असम में 14,95,038 किसान लाभ पा चुके हैं.

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गैर भाजपा और गैर कांग्रेसी सरकारें भी पीछे नहीं

आपको बता दें कि वाईएसआर कांग्रेस शासित आंध्र प्रदेश के 34,92,785 किसान लाभान्वित हो चुके हैं. वहीं बीजेडी शासित ओडिशा में 9,74,481 किसानों को पैसा मिला है. सीपीआई-एम शासित केरल के लोग भी फायदा लेने में पीछे नहीं हैं.

बता दें कि यहां के 14,71,903 किसानों को खेती-किसानी के लिए सम्मान निधि की दो किस्त मिल चुकी है. हालांकि, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में एक भी किसान को लाभ नहीं मिला है.

मालूम हो कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी के अनुसार केंद्र सरकार का काम पैसा देना है, लेकिन दिल्ली, पश्चिम बंगाल और कुछ कांग्रेसी सरकारें सहयोग नहीं कर रही हैं. दरअसल ये सरकारें जान बूझकर किसान सम्मान निधि के लिए सूची भेज नहीं रही हैं.

यही कारण है कि वजह से इन राज्यों के किसानों को 6000 रुपये नहीं मिल रहे हैं. कैलाश चौधरी के अनुसार इसका जवाब उन्हें जनता देगी. चौधरी ने बोला कि कुछ राज्य सरकारें इस स्कीम में सहयोग न करके किसानों के साथ धोखा कर रही हैं.

बीजेपी शासित राज्यों ने उठाया सबसे ज्यादा फायदा

जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार की यह स्कीम किसानों को बीजेपी के साथ जोड़ने में काफी हद तक कामयाब रही है. जी हां, दरअसल यही कारण है कि दोबारा सत्ता में आते ही इसका विस्तार सभी 14.5 करोड़ किसानों के लिए कर दिया गया. मालूम हो कि बीजेपी के मुख्यमंत्रियों ने इसे अपने-अपने राज्य में बहुत तेजी से लागू करवाया और चुनाव में उसका फायदा मिला.

आपको बता दें कि योगी आदित्यनाथ की सरकार अपने राज्य के किसानों को इसका सबसे ज्यादा लाभ पहुंचाने में सफल रही है. जी हां, दरअसल एक आंकड़े के मुताबिक यहां के 1,20,23,189 किसानों के बैंक अकाउंट में चार-चार हजार रुपये पहुंच चुके हैं.

नहीं मिला है लाभ तो क्या करना चाहिए आपको

आपको बता दें कि सर्वप्रथम आपको कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. जी हां, दरअसल पहले प्रशासन उसका वेरीफिकेशन करेगा. मालूम हो कि आपको रेवेन्यू रिकॉर्ड, बैंक अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर और आधार नंबर देना होगा. अगर किसी प्रकार का कोई कन्फ्यूजन है तो आपको अपने लेखपाल से संपर्क करना होगा. दरअसल लेखपाल ही यह वेरीफाई करता है कि आप किसान हैं.

हालांकि अगर लेखपाल और कृषि अधिकारी किसी असली किसान को इसका लाभ देने में आनाकानी कर रहे हैं तो सोमवार से शुक्रवार तक पीएम-किसान हेल्प डेस्क के ई-मेल (pmkisan-ict@gov.in) पर संपर्क कर सकते हैं.

मालूम हो कि अगर वहां से भी न बात बने तो इस सेल के फोन नंबर 011-23381092 पर फोन कर सकते हैं. दरअसल यह केंद्रीय कृषि मंत्रालय की हेल्पलाइन है और इस पर आपकी बात जरूर सुनी जाएगी.

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