Loading...

भारत से सहयोग बढ़ाने के लिए अमेरिका तैयार, लेकिन व्यापार और रक्षा जैसे मुद्दों का नहीं निकला कोई हल

0 14

भारत और अमेरिका के संबंध तो बहुत पुराने हैं लेकिन जैसे जैसे भारत ग्लोबली मजबूत हो रहा है वैसे वैसे अमेरिका को चुभन हो रही है। यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के मध्य कुछ खटपट हुई है। हालांकि भारत के दौरे पर आए अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट माइक पॉम्पियो ने बुधवार को भारत के साथ संबंधों को मजबूत बनाने की बात कही।

जी हां, दरअसल उन्होंने नए सिरे से संबंधों को सुधारने की कोशिश करने का वादा तो किया, लेकिन व्यापार और इन्वेस्टमेंट को लेकर भारत और अमेरिका के बीच विवाद को दूर करने को लेकर कोई बात नहीं कही।

दरअसल इन दोनों देशों के बीच इस समय कई मुद्दों पर विवाद जारी है। इनमें अमेरिकी कंपनियों की भारतीय बाजार में पहुंच, डाटा सिक्योरिटी और अमेरिका को किया जाने वाला स्टील और एल्युमीनियम का निर्यात जैसे मुद्दे शामिल हैं।

व्यापार का विवाद

Loading...

आपको बता दें कि फरवरी में भारत सरकार ने ई-कॉमर्स के नए नियमों को लागू किया। लेकिन मोदी सरकार का यह दांव अमेरिका को रास नहीं आया, क्योंकि इसकी वजह से अमेरिका की दो सबसे बड़ी कंपनियों- वॉलमार्ट और अमेजन डॉट कॉम का व्यापार प्रभावित हुआ। मालूम हो कि वॉलमार्ट ने पिछले साल देश की ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart में 16 अरब डॉलर का निवेश किया था। दरअसल भारत सरकार के इस कदम के बाद दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया। इसी कारण अमेरिका ने भारत को व्यापार में दी जाने वाली प्राथमिकताएं खत्म कर दीं। हालांकि इसके जवाब में भारत ने 28 अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिया।

तेल एवं मिसाइल को लेकर विवाद

आपको पता ही होगा कि अमेरिका ने रूस और ईरान दोनों पर प्रतिबंध लगा रखा है, ऐसे में इन दाेनों देशों से भारत की बढ़ती नजदीकियां भी अमेरिका को भा नहीं रही है। दरअसल अमेरिकी दबाव में भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया है। हालांकि अब अमेरिका भारत पर यह भी दबाव डाल रहा है कि वे रूस से S-400 सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम न खरीदे।

इन मुद्दों पर साथ हैं भारत-अमेरिका

दरअसल अगर तनाव के मुद्दों को हटा दें तो कई मुद्दों पर भारत और अमेरिका एक-दूसरे के समर्थक भी हैं। जी हां, जैसे- दोनों देश आतंकवाद रोकने के लिए संयुक्त प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा दोनों देशों के लिए चीन एक बड़ा दुश्मन है, जिसे रोकना उनकी प्राथमिकता है। विशेषज्ञों की मानें तो विवाद के मुद्दों पर दोनों देश क्या राह निकालते हैं, यह जापान में होने वाली G20 बैठक में साफ होगा।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.