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नागालैंड के शिजामी गांव ने पेश की बराबरी की मिसाल, यहां पुरुषों के बराबर मिलता है महिलाओं को वेतन

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पुरुषों एवं महिलाओं को समान वेतन मिले इस विषय पर विश्व में बहुत से देश काफी लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल उनकी मांग है कि समान काम के लिए पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन मिलना चाहिए। बता दें कि हाल ही में समान वेतन को लेकर स्विटजरलैंड की महिलओं ने सड़कों पर प्रदर्शन किया।

लेकिन एक हैरान करने वाली बात यह है कि जहां एक ओर महिलाएं अपने हक के लिए लड़ रही हैं वहीं दूसरी ओर भारत के नागालैंड के एक गांव में महिलाओं को बीते 30 सालों से वह सब मिला हुआ है जो उन्होंने चाहा।

जी हां, दरअसल नगालैंड के फेक जिले में शिजामी की हिम्मत वाली महिलाओं ने आठ साल की लड़ाई के बाद साल 2015 में पुरुष के बराबर वेतन पाने में सफल हुईं। बता दें कि इस लड़ाई में कई संवेदनशील पुरुषों ने भी उनका साथ दिया है हालांकि उनकी लड़ाई अब तक खत्म नहीं हुई है।

पुरुषों की तरह ही खेतों पर लगातार बैठकर काम करती हैं महिलाएं

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आपको बता दें कि शिजामी की महिला किसानों ने बताया कि पुरुषों को यह कहते हुए ज्यादा भुगतान किया गया कि वह खेतों पर ज्यादा मेहनत करते हैं। दरअसल गांव के महिला संगठन की अध्यक्ष केंजुन्यपी यू सुहा ने बताया कि महिलाओं ने तर्क दिया कि महिलाएं वह कर सकती हैं जो पुरुष नहीं कर सकते। वह पूरा दिन पुरुषों की तरह ही खेतों पर लगातार बैठकर काम करती हैं।

मालूम हो कि गांव में सीढ़ीदार खेतों में ये महिलाएं हैं बिना किसी यांत्रिक सहायता के अधिकांश खेत में काम करती हैं। वह कहती हैं कि हमने साल 2007 से 7 साल के लिए ग्राम परिषद और उसके कल्याण मंच के साथ समान मजदूरी के विचार को आगे बढ़ाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। कुछ पुरुष हमारे साथ आए और हमारा समर्थन किया।

धान रोपाई के समय 450 रुपये प्रति दिन और बाकी साल 400 रुपये मजदूरी निर्धारित

आपको बता दें कि इस गांव में सभी प्रकार के गैर-विशिष्ट कृषि और मैनुअल काम के लिए समान मजदूरी लागू होती है। मालूम हो कि धान रोपाई के समय यानी 1 जून से मध्य जुलाई तक के दौरान 450 रुपये प्रति दिन और बाकी साल 400 रुपये मजदूरी निर्धारित है।

बता दें कि बादाम और ओक के पेड़ों वाले पहाड़ों से घिरे शिजामी गांव में 600 घर हैं और इनमें लगभग 5,000 लोग रहते हैं। लगभग 20-30% परिवार अपने पारिवारिक क्षेत्रों में काम करने के अलावा खेतों पर मजदूरी करते हैं।

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