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अब पहले से आसान हुआ पायलट बनना, 5 साल में 200 घंटे की उड़ान का नियम हुआ समाप्त

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देश में इन दिनों कमर्शियल पायलटों की काफी कमी है और अब इसी कमी को देखते हुये सरकार ने पायलट लाइसेंस हासिल करने के नियम आसान कर दिए हैं। जी हां, दरअसल नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पायलट लाइसेंस के लिए उड़ान-अनुभव की शर्तों में दे दी है।

दरअसल अब उन पायलटों को भी लाइसेंस देने का फैसला किया है जिनका पिछले 5 साल में उड़ान भरने का कोई अनुभव न रहा हो। मालूम हो कि पहले आवेदन करने की तिथि से पिछले 5 साल में कम से कम 200 घंटे की उड़ान का अनुभव अनिवार्य था।

एयरक्राफ्ट रूल्स-1937 में किया है संशोधन

दरअसल मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर एयरक्राफ्ट रूल्स-1937 में संशोधन कर दिया है। बता दें कि अब प्रशिक्षण और उड़ान अनुभव हासिल करने के कितने भी समय बाद पायलट लाइसेंस के लिए आवेदन किया जा सकेगा। इसके साथ ही करियर के बीच में अंतराल आने से भी दोबारा लाइसेंस हासिल करने में पायलट को कोई दिक्कत नहीं होगी।

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यहां आपको बता दें कि देश में हवाई यात्रियों की संख्या पिछले 4 साल में 20% सालाना की दर से बढ़ी है। दरअसल इसे देखते हुए विमान सेवा कंपनियों ने बड़ी संख्या में विमानों के ऑर्डर दिए हुए हैं। बता दें कि इनके लिए प्रशिक्षत मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती है। मालूम हो कि सरकार ने इसी के मद्देनजर पायलट लाइसेंस हासिल करने के नियम आसान किए हैं।

एटीसी अधिकारियों को 31 दिसंबर तक लेना होगा लाइसेंस

जानकारी के लिए बता दें कि हवाई यातायात नियंत्रक (यानी कि एटीसी) अधिकारियों के लिए पहली बार लाइसेंस की व्यवस्था करने के बाद सरकार ने सभी मौजूदा एटीसी अधिकारियों के लिए लाइसेंस हासिल करने के लिए 31 दिसंबर 2019 तक का समय तय किया है।

जी हां, दरअसल नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एक अधिसूचना में बताया कि जो एटीसी अधिकारी 05 नवंबर 2018 से पहले हवाई यातायात नियंत्रक की जिम्मेदारी निभा रहे थे वे लाइसेंस हासिल करने तक या 31 दिसंबर 2019 तक काम करना जारी रख सकते हैं।

आपको एक और महत्वपूर्ण बात बता दें कि इस नई व्यवस्था के तहत लाइसेंस जारी करने और इसके लिए परीक्षाएं आयोजित करने की जिम्मेदारी नागर विमानन महानिदेशालय को दी गई है।

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