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मोदी सरकार मजदूरों को जल्द दे सकती है यह नया तोहफा, सामान्य न्यूनतम वेतन नियम हो सकता है लागू

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केंद्र की मोदी सरकार देश के श्रमिकों को समान अधिकार दिलाने की पहल करते हुए समान न्यूनतम वेतन का तोहफा देने की तैयारी में है.

जी हां, दरअसल सुधारों की दिशा में आगे कदम बढ़ाते हुए श्रम मंत्रालय जल्द वेतन संहिता विधेयक को मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रख सकता है. बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस विधेयक को चालू सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है.

मालूम हो कि पिछले महीने 16वीं लोकसभा के भंग होने के कारण इस विधेयक को मंजूरी नहीं मिल पाई थी. दरअसल अब मंत्रालय फिर से इस विधेयक को संसद में पेश करने से पहले कैबिनेट की मंजूरी दिलाना चाहता है.

जानिए किनको मिलेगा समान वेतन

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मालूम हो कि इस विधेयक के पास होने के बाद केंद्र सरकार को कुछ विशेष सेक्टर के लिए सभी लोगों को न्यूनतम समान वेतन देने का अधिकार मिल जाएगा. दरअसल इसमें रेलवे और खनन सेक्टर शामिल हैं. अन्य प्रकार की श्रेणी के लिए वेतनमान तय करने के लिए राज्य स्वतंत्र होंगे.

बता दें कि इस विधेयक के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर एक न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी. इसके अलावा केंद्र सरकार विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करेगी. यही नहीं, इस विधेयक में यह प्रावधान भी है कि हर 5 साल बाद न्यूनतम वेतन में बदलाव किया जाएगा.

मालूम हो कि इस विधेयक में न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देने पर नियोक्ताओं पर जुर्माने का भी प्रावधान है. जी हां, दरअसल यदि कोई नियोक्ता तय मजदूरी से कम का भुगतान करता है तो उस पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा. इसके अलावा यदि वह 5 साल के दौरान दोबारा ऐसा करता है तो उसे 3 माह तक का कारावास और 1 लाख रुपए तक जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है.

इस विधेयक के पास होने के बाद होगा ये बदलाव

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर यह विधेयक पास होता है तो यह विधेयक मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936, न्यूनतम मजदूरी कानून 1948, बोनस भुगतान कानून 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 की जगह लेगा.

मालूम हो कि इस विधेयक के पास होने के बाद केंद्र सरकार को कुछ विशेष सेक्टर के लिए सभी लोगों को न्यूनतम समान वेतन देने का अधिकार मिल जाएगा और हर 5 साल बाद न्यूनतम वेतन में बदलाव किया जाएगा.

महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को विधेयक में बनाया गया है अहम मुद्दा

आपको बता दें कि महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को इस विधेयक में सबसे अधिक ध्यान में रखा गया है. जी हां, दरअसल इस विधेयक के अनुसार महिलाओं के लिए काम का समय सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे के बीच होना चाहिए. यदि शाम 7 के बाद महिलाएं काम करती हैं तो नियोक्ता को उनकी सुरक्षा का पूर्ण इंतजाम करना होगा.

सिर्फ यही नहीं, इसके अलावा छुट्टी के दिन महिलाओं को काम पर नहीं बुलाया जा सकता है. अगर जरूरी काम के चलते उन्हें बुलाना पड़ता है तो नियोक्ता को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी.

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