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अगर आप निवेश करना चाहते हैं तो जान लीजिए PPF और FD में क्या है फर्क, किसमें मिलेगा ज्यादा रिटर्न

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जब बात निवेश की आती है तो मौजूदा समय में इन्वेस्ट करने के लिए बाजार में कई प्रोडक्ट मौजूद हैं। लेकिन ऐसा भी होता है कि हर प्रोडक्ट आपकी जरूरत के मुताबिक नहीं होता। ऐसे में जो सबसे अच्छा तरीका है वो ये है कि किसी भी प्रोडक्ट में निवेश करने से पहले अपनी जरूरत के हिसाब से दो-तीन प्रोडक्ट्स की तुलना कर लेनी चाहिए।

दरअसल आज हम आपको कुछ ऐसा ही बताने जा रहे हैं। बता दें कि आज हम आपको बताएंगे कि Fixed Deposit (FD) और Public Provident Fund (PPF) में क्या फर्क है, जिससे आप सोच-समझकर इन स्कीम्स में अपना पैसा लगा सकें।

अवधि

आपको बता दें कि पीपीएफ में आपका पैसा 15 साल के लिए लॉक हो जाता है। मैच्योरिटी के एक साल के अंदर आप लॉक-इन पीरियड को 5, 10, 15 या उससे अधिक साल के लिए बढ़ा सकते हैं।

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वहीं दूसरी तरफ एफडी में समयावधि का ऐसा कोई नियम नहीं है। एफडी बैंकों और नॉन-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं की तरफ से जारी किए जाने वाला इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट है। दरअसल लोग सेविंग्स अकाउंट से ज्यादा ब्याज दर पाने के लिए FD में निवेश कर सकते हैं। बता दें कि इसमें लॉक-इन पीरियड 7 दिन से लेकर 10 साल तक का होता है।

ब्याज दर

मालूम हो कि पीपीएफ में ब्याज दर हर तिमाही में सरकार की ओर से तय की जाती है। जी हां, दरअसल फिलहाल यह ब्याज दर 8% सालाना है।

वहीं, FD की बात की जाए तो अलग-अलग बैंक में FD के लिए अलग-अलग ब्याज दरें हैं। जी हां, दरअसल SBI, HDFC बैंक, PNB, ICICI जैसे बड़े बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर 5.75% से लेकर 7.50% तक ब्याज लगा रहे हैं। वहीं छोटे वित्तीय संस्थानों में एफडी पर ज्यादा ब्याज दर ऑफर की जाती हैं। हालांकि निवेश की अवधि के मुताबिक ब्याज दर तय होता है।

इनकम टैक्स में क्या है फायदा

पीपीएफ की बात करें तो इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत पीपीएफ डिपॉजिट पर इनकम टैक्स में छूट मिलती है।

वहीं अगर फिक्स्ड डिपॉजिट की बात की जाए तो 5 साल के फिक्स्ड डिपॉजिट पर भी सेक्शन 80सी के तहत इनकम टैक्स में छूट मिलती है।

प्रीमैच्योर विदड्रॉल

पीपीएफ में प्रीमैच्योर विदड्रॉल की बात की जाए तो बता दें कि अकाउंट के मैच्योर होने से पहले अगर आप पैसा निकालना चाहते हैं तो आप 6 साल पूरे होने पर प्रीमैच्योर विदड्रॉल कर सकते हैं। हालांकि यह भी जान लें कि आप सिर्फ एक तय रकम ही निकाल सकते हैं। इसके बाद आप साल में एक ही बार पैसा निकाल सकते हैं।

वहीं एफडी के प्रीमैच्योर विदड्रॉल की बात करें तो बता दें कि पहले तो दो तरह की एफडी होती हैं। एक रेगुलर एफडी, जिसमें प्रीमैच्योर विदड्रॉवल की सुविधा दी जाती है। वहीं दूसरी 5 साल या 10 साल के लॉक-इन पीरियड वाली एफडी, जिसमें इनकम टैक्स में फायदे मिलते हैं।

डिपॉजिट

आपको बता दें पीपीएफ में साल में 1.5 लाख रुपए डिपॉजिट किए जा सकते हैं।

वहीं एफडी में डिपॉजिट की कोई सीमा नहीं है।

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