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नौकरीपेशा वालों के लिए ये खबर है जरूरी, जानिए फार्म 16 से जुड़े अपने अधिकारों के बारें में

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सभी नौकरीपेशा लोगों के लिए फॉर्म-16 बेहद जरूरी होता है. हालांकि इसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है. दरअसल फॉर्म 16 से जुड़े आपके अधिकारों के बारे में मशहूर टैक्स एक्सपर्ट गौरी चढ्डा का कहना है टैक्स कानून में तरह-तरह के फॉर्मों का जिक्र है. इनका उपयोग अलग-अलग जरूरतों के लिए होता है.

दरअसल इन्हीं में से एक है फॉर्म 16. बता दें कि कर्मचारी के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण है. दरअसल इसे नौकरी देने वाला संस्थान जारी करता है. यह फॉर्म रिटर्न दाखिल करने में मदद करता है. साथ ही इसका इस्तेमाल इनकम के सबूत के तौर पर होता है.

वैसे देखा जाए तो अक्सर फॉर्म 16 जून तक मिल जाता है. TDS रिटर्न फाइल करने की तारीख को बढ़ाया गया है. हालांकि फिलहाल 10 जुलाई तक फॉर्म 16 मिलेगा. बता दें कि इस फॉर्म से जुड़ी और कई जरूरी चीजों के बारे में हम यहां बता रहे हैं.

फॉर्म 16 से जुड़े ये हैं आपके अधिकार

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आपको बता दें कि मशहूर टैक्स एक्सपर्ट गौरी चढ्डा के अनुसार टैक्सपेयर्स फॉर्म 16 में लिखी सभी जानकारी को देखें. अगर आपका इम्प्लॉयर (कंपनी) फॉर्म 16 नहीं देता तो इम्प्लॉयर पेनाल्टी का प्रावधान है. मालूम हो कि सेक्शन 272 के तहत 100 रुपये रोजाना पेनाल्टी का नियम है. असेसिंग ऑफिर को इम्प्लॉयर की शिकायत कर सकते हैं.

मालूम हो कि फॉर्म 16 में कोई भी गलती होने पर इम्प्लॉयर को जानकारी दें. फॉर्म 16 में गलती सुधारने के बाद रिटर्न फाइल कीजिए. फॉर्म 16 में पार्ट A और B TRACES से डाउनलोड होगा.

यहां आपको बता दें कि फॉर्म 16 और रिटर्न में कोई अंतर नहीं होना चाहिए. फॉर्म 16 मिलने पर पैन नंबर, सैलरी और टैक्स छूट के ब्यौरे को जांच लें. साथ ही इम्प्लॉयर का पैन, TAN, हस्ताक्षर और स्टांप को भी जांच लें.

बता दें कि नए निवेश की जानकारी इम्प्लॉयर को जरुर दें. जी हां, दरअसल इम्प्लॉयर को जानकारी नहीं होने पर रिटर्न में मिसमैच होगा. मालूम हो कि नौकरी बदलने पर पुराने और नए इम्प्लॉयर से दो फॉर्म 16 मिलेंगे. दो फॉर्म 16 की वजह से टैक्स बचत दो बार नहीं कर सकते है.

फॉर्म-16 से जुड़ी ये हैं जरूरी बातें

(1) दरअसल फॉर्म-16 एक तरह का सर्टिफिकेट है. इसे कंपनियां अपने कर्मचारियों को जारी करती हैं. बता दें कि यह कर्मचारी की सैलरी से काटे गए TDS (स्रोत पर कर कटौती) को सर्टिफाई करता है. दरअसल इससे यह भी पता चलता है कि संस्थान ने टीडीएस काटकर सरकार को जमा कर दिया है.

(2) आपको बता दें कि फॉर्म-16 फॉर्म के दो हिस्से होते हैं. पार्ट ए और पार्ट बी. जी हां, दरअसल पार्ट ए में संस्थान का TAN, उसका और कर्मचारी का पैन, पता, एसेसमेंट ईयर, रोजगार की अवधि और सरकार को जमा किए गए टीडीएस का संक्षिप्त ब्योरा होता है.

(3) वहीं पार्ट बी में सैलरी का ब्रेक-अप, क्लेम किए गए डिडक्शन, कुल टैक्स योग्य इनकम और सैलरी से काटे गए टैक्स का ब्योरा शामिल होता है.

(4) मालूम हो कि कंपनी को फॉर्म 16 जारी करना पड़ता है. वहीं अगर साल के बीच में नौकरी बदलती है तो भी कंपनी को फॉर्म 16 जारी करना पड़ता है.

(5) आपको बता दें कि फॉर्म 16 आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने में मदद करता है. दरअसल इसका इस्तेमाल इनकम के सबूत की तरह होता है. इसके अलावा लोन के आंकलन और इसे मंजूर करने में इसकी प्रति (कॉपी) साथ में लगाई जाती है.

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