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विलेन होने के बाद भी एक करोड़ रुपए फीस लेते थे अमरीश पुरी, कभी नहीं मिला बेस्ट एक्टर का अवार्ड

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1970 में अमरीश पुरी की पहली फिल्म प्रेम पुजारी रिलीज हुई। अमरीश पुरी को फिल्म मिस्टर इंडिया में मोगैंबो के किरदार में सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिली। उन्होंने ज्यादातर बॉलीवुड फिल्मों में विलेन का किरदार निभाया और वे बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन विलेन माने जाते हैं। उनकी फिल्म डायलॉग मोगैंबो खुश हुआ आज भी आज भी लोकप्रिय है।

वह रियल लाइफ में अनुशासन वाले व्यक्ति थे। बता दे कि अमरीश पुरी बॉलीवुड के सबसे महंगे विलेन थे जो एक फिल्म करने के लिए एक करोड़ रुपए तक की फीस लेते थे। हालांकि वह उन जगह फीस कम भी कर देते जहां उनकी जान पहचान होती थी।

खबरों की मानें तो अमरीश पुरी ने एन.एन. सिप्पी की फिल्म मन मुताबिक फीस ना मिलने की वजह से छोड़ दी थी। उन्होंने इस फिल्म को साइन किया था। फिल्म की शूटिंग दो-तीन साल बाद शुरू हो पाई थी। इसी कारण उन्होंने उस समय के रेट के हिसाब से फीस मांगी थी।

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इंटरव्यू में अमरीश पुरी ने बताया कि कभी भी मैंने अपने अभिनय से समझौता नहीं किया। मेरे फिल्म में होने से निर्माताओं को अपने वितरकों से पैसा मिलता है। लोग पागलों की तरह मुझे देखने जाते हैं। क्या मैं इस फीस का हकदार नहीं हूं। उन्होंने मुझे बहुत पहले फिल्म के लिए साइन किया था। उन्होंने कहा था कि 1 साल बाद फिल्म की शूटिंग शुरू होगी। लेकिन 3 साल बाद फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। उस समय रेट भी काफी बढ़ चुके थे। इसीलिए मैंने ज्यादा फीस की डिमांड की।

अमरीश पुरी को कभी भी बेस्ट एक्टर का अवार्ड नहीं मिला। लेकिन उन्हें कुछ फिल्मों में सपोर्टिंग किरदार निभाने के लिए अवार्ड जरूर मिला। उन्होंने 35 सालों से ज्यादा तक हिंदी सिनेमा में अपना योगदान दिया।

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