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धर्म के नाम पर मुसलमानों को मिला बड़ा धोखा, 1700 करोड़ रु का घोटाला कर रफूचक्कर हुआ मंसूर खान

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एक घोटालेबाज देश के 30 हजार से ज्यादा मुसलमानों के हजारों करोड़ रुपये लेकर फरार हो गया है। जी हां, दरअसल निजी फर्म को इस्लामी बैंक और उसमें जमा पैसे से मिलने वाले ब्याज को हलाल बता कर इस शख्स ने इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया। बता दें कि इस इस फर्म का नाम आई मोनेटरी अडवाइजरी यानी कि आईएमए ग्रुप है। मालूम हो कि यह मुख्यतः कर्नाटक में सक्रिय था।

आपको बता दें कि इस्लामी बैंक के नाम पर हुए इस हजारों करोड़ रुपये के इस स्कैम ने मध्यम वर्गीय मुसलमानों के भरोसे को तोड़कर रख दिया है। दरअसल इस स्कैम की वजह से मुस्लिम नेताओं और उलेमाओं पर लोगों के भरोसे को भारी नुकसान पहुंचा है।

बता दें कि अभी तक 17 सौ करोड़ रुपये के घोटाला सामना आया है। हालांकि आशंका जताई जा रही है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी वैसे-वैसे घोटाले की रकम भी बढ़ सकती है। इसी बीच अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया है कि इस स्कैम की वजह से उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।

जी हां,दरअसल नेताओं का मानना है कि आईएमए के संस्थापक मालिक मोहम्मद मंसूर खान के साथ सार्वजनिक तौर पर जुड़ाव की बात सामने आने से उनकी साख पर बट्टा लगा है।

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यहां बता दें कि कि मंसूर सार्वजनिक कार्यक्रमों और मुशायरों वगैरह में नेताओं के साथ नजर आता रहता था। वह उलेमाओं से ऑडिट बुक का समर्थन और विज्ञापन करवाता था। मालूम हो कि 2 साल पहले मंसूर ने इन्हीं सब आधार पर बुकलेट निकलवाकर अपने फर्म में होने वाले सभी निवेशों के हलाल होने की घोषणा की थी।

जानकारी के लिए बता दें कि एक सीनियर मुस्लिम कांग्रेस नेता ने कहा है कि उलेमाओं और नेताओं से आम जनता को जो भरोसा है, उसे ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा, ‘कई उलेमा ऐसे भी हैं, जिन्होंने शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान कुरान की सीख और धार्मिक प्रवचन देने की बजाए मंसूर और उसकी कंपनियों के कल्याण के लिए प्रार्थनाएं भी कीं। कुछ उलेमाओं ने तो फतवे भी जारी किए।’

यही नहीं, इसके अलवा मुस्लिम नेताओं की बड़ी संख्या ऐसी भी है, जो मंसूर के दान के लाभार्थी भी रहे हैं। जी हां, दरअसल मंसूर की तरफ से यह दान चुनावी फंडिंग या फिर सरकारी स्कूलों के रिनोवेशन के तौर पर की जाती थी। बता दें कि विभिन्न अवसरों पर नेता और उलेमा मंसूर के साथ नजर भी आ जाते थे, जिससे लोगों का विश्वास उस पर और भी पुख्ता हो जाता था।

मालूम हो कि आरोपी मोहम्मद मंसूर खान ने इस्लामिक बैंक के नाम पर करीब 30 हजार लोगों को चूना लगाया और दुबई भाग निकला। बता दें कि अभी तक की जांच में यह घोटाला 1700 करोड़ रुपये से भी अधिक का हो चुका है। आपको बता दें कि करीब 30 हजार मुस्लिम निवेशकों ने ‘हलाल रिटर्न’ और हद से ज्यादा प्रॉफिट के लालच में अपनी पूंजी मंसूर खान के हाथों में दे दी थी जो जहिर है कि अब डूब गई।

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