Loading...

मोदी सरकार ने तैयार किया ये खास प्लान, अब बांस लगाकर देश के किसान कर सकेंगे लाखों की कमाई

0 17

मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल से ये संकेत दे दिए हैं कि वो किसानों को कर्ज से उबारकर उनकी आय दोगुनी करने का हर संभव प्रयास करेगी और इसी प्रयास को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों के लिए एक और बड़ा दांव चला है.

जी हां, दरअसल किसान अब बांस की खेती करके करोड़ों की कमाई कर सकते हैं. बता दें कि बांस काटने पर फॉरेस्ट एक्ट नहीं लगेगा, जबकि कांग्रेस के शासन में बांस काटने तक पर वन कानून लागू हो जाता था. एफआईआर होती थी. फॉरेस्ट अधिकारी और पुलिस किसान को परेशान करते थे. इसलिए वो बांस लगाने से बचता था. लेकिन अब सरकार ने न सिर्फ नियम बदला है बल्कि इसकी व्यापक पैमाने पर खेती के लिए राष्ट्रीय बैंबू मिशन भी बनाया है.

मालूम हो कि इसके तहत किसान को बांस की खेती करने पर प्रति पौधा 120 रुपये की सरकारी सहायता भी मिलेगी. दरअसल सरकार की कोशिश है कि किसान बांस की खेती करके मोटा लाभ कमाएं.

मोदी सरकार की इस स्कीम के बारे में न्यूज18 के हिंदी चैनल से वार्तालाप में कृषि मंत्रालय की एडिशनल सेक्रेटरी अल्का भार्गव ने बताया कि, “सरकार बांस की खेती को मिशन की तरह आगे बढ़ा रही है. इसके लिए राष्ट्रीय बैंबू मिशन बनाया गया है. हर राज्य में मिशन डायरेक्टर बनाए गए हैं. वो जिलेवार अधिकारी तय कर रहे हैं कि कौन इस काम को देखेगा. इसमें एग्रीकल्चर, फॉरेस्ट और इंडस्ट्री तीन विभाग शामिल है. इंडस्ट्री इसके प्रोडक्ट की मार्केट बताएगी.”

Loading...

केवल निजी जमीन पर नहीं लगेगा वन कानून

दरअसल जनवरी 2018 में केंद्र सरकार ने बांस को पेड़ की कटेगरी से हटा दिया था. हालांकि ऐसा सिर्फ निजी जमीन के लिए किया गया है. जो फारेस्ट की जमीन पर बांस हैं उन पर यह छूट नहीं है. वहां पर वन कानून लागू होगा.

किस काम के लिए चाहिए ये पहले से तय करें

बता दें कि सरकारी नर्सरी से पौध फ्री मिलेगी. दरअसल इसकी 136 प्रजातियां हैं. मालूम हो कि अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग बांस की किस्में हैं लेकिन उनमें से 10 का इस्तेमाल सबसे ज्यादा हो रहा है. बता दें कि यह देखकर प्रजाति का चयन करना होगा कि आप किस काम के लिए बांस लगा रहे हैं. अगर फर्नीचर के लिए लगा रहे हैं तो संबंधित प्रजाति का चयन करना होगा.

इतने साल में तैयार हो जाती है खेती

आपको बता दें कि बांस की खेती आमतौर पर 3 से 4 साल में तैयार होती है. बता दें कि चौथे साल में कटाई शुरू कर सकते हैं. चूंकि इसका पौधा तीन-चार मीटर की दूरी पर लगाया जाता है इसलिए इसके बीच की जगह पर आप कोई और खेती कर सकते हैं.

मालूम हो कि इसकी पत्तियां पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल हो सकती हैं. बांस लगाएंगे तो फर्नीचर के लिए पेड़ों की कटान कम होगी. इससे आप पर्यावरण रक्षा भी करेंगे. बता दें कि अभी हम काफी फर्नीचर चीन से मंगा रहे हैं, इसलिए आप इसकी खेती से इंपोर्ट कम कर सकते हैं.

किसान को इतनी सरकारी सहायता मिलेगी

मालूम हो कि 3 साल में औसतन 240 रुपये प्रति प्लांट की लागत आएगीजिसमें से 120 रुपये प्रति प्लांट सरकारी सहायता मिलेगी. मालूम हो कि नार्थ ईस्ट को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में इसकी खेती के लिए 50 % सरकार और 50 % किसान लगाएगा.

इसके अलावा 50 % सरकारी शेयर में 60 % केंद्र और 40 % राज्य की हिस्सेदारी होगी. जबकि नार्थ ईस्ट में 60 % सरकार और 40 % किसान लगाएगा.

बता दें कि 60 % सरकारी पैसे में 90 % केंद्र और 10 % राज्य सरकार का शेयर होगा. मालूम हो कि जिले में इसका नोडल अधिकारी आपको पूरी जानकारी दे देगा.

इतनी होगी इनकम

आपको बता दें कि जरूरत और प्रजाति के हिसाब से आप 1 हेक्टेयर में 1500 से 2500 पौधे लगा सकते हैं.दरअसल अगर आप 3 गुणा 2.5 मीटर पर पौधा लगाते हैं तो एक हेक्टेयर में करीब 1500 प्लांट लगेंगे. इसके साथ ही में आप दो पौधों के बीच में बची जगह में दूसरी फसल उगा सकते हैं.

बता दें कि 4 साल बाद 3 से 3.5 लाख रुपये की कमाई होने लगेगी. खास बात यह है कि हर साल रिप्लांटेशन करने की जरूरत नहीं ऐसा इसलिए क्योंकि बांस की पौध करीब 40 साल तक चलती है.

वहीं, दूसरी फसलों के साथ खेत की मेड़ पर 4 गुणा 4 मीटर पर यदि आप बांस लगाते हैं तो एक हेक्टेयर में चौथे साल से करीब 30 हजार रुपये की कमाई होने लगेगी. बता दें कि इसकी खेती किसान का रिस्क फैक्टर कम करती है क्योंकि किसान बांस के बीच दूसरी खेती भी कर सकता है.

बांस से ये सब बना सकते हैं आप

आपको बता दें कि आजकल बांस कंस्ट्रक्शन के काम आ रहा है. दरअसल आप इससे घर के अलावा ये निम्नलिखित चीजें बना सकते हैं:

फ्लोरिंग कर सकते हैं

फर्नीचर बना सकते हैं

हैंडीक्रॉफ्ट और ज्वैलरी बना सकते हैं

बैंबू से अब साइकिलें भी बनने लगी हैं

दरअसल कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का दावा है कि सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई), रुड़की ने इसे कंस्ट्रक्शन के काम में लाने की मंजूरी दी है. बता दें कि अब शेड डालने के लिए सीमेंट की जगह बांस की सीट भी तैयार की जा रही है.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.