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मोदी सरकार का मजदूरों का बड़ा तोहफा, अब मेट्रो शहरों में झोपड़ी पट्टी में नहीं रहेंगे मजदूर

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मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में सबको घर देने का वादा निभाकर गरीबों और मजदूरों को तोहफा देने की तैयारी में है. जी हां, दरअसल केंद्र सरकार एक प्रस्ताव तैयार कर रही है जिसके तहत देश के मेट्रो शहरों के गरीबों और मजदूरों को पक्का मकान किराये से मिल सकेगा. जहां सारी बुनियादी सुविधाएं मौजूद रहेंगी.

दरअसल, आवास और शहरी मामलो के मंत्रालय एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है. जी हां, बता दें कि इस प्रस्ताव के अंतर्गत 3 लाख रुपये सालाना या उससे कम आमदनी वाले गरीब, मजदूरों को महागनरों में एक कमरा किराये से देने की योजना तैयार की है.

आपको बता दें कि मंत्रालय इस योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ जोड़ देगा. बता दें कि इस योजना में झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोगों को भी मुख्यधारा से जोड़ा सकता है जिन्हें साफ पानी शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी.

माइग्रेंट मजदूरों को मिलेगा इसका फायदा

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यहां आपको बता दें कि अंग्रेजी अखबार इकॉनोमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, सिंगल रूम की ऊंची इमारते तैयार की जाएंगी और जिसमें झोपड़पट्टी में रहने वाले लोगों को किराये से घर दिए जाएंगे.

बता दें कि इस योजना में उन लोगों को शामिल किया जाएगा, जो गांवों से रोजी रोटी के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करते हैं. दरअसल उनके पास इतने पैसे नहीं होते, कि बड़े महानगरों में अच्छा सा किराये का घर या अपना घर ले सकें.

मजदूर फंड का किया जाएगा इस्तेमाल

आपको बता दें कि कि इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए शुरुआती दौर में मजदूर फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है. जी हां, दरअसल इसके लिए हाउसिंग बोर्ड बनाया जाएगा. बता दें कि इसका संचालन आवास और शहरी मंत्रालय करेगा.

मालूम हो कि इसका एक दूसरा मॉडल ये भी है कि निजी कंपनियों को भी मकान निर्माण की अनुमति दी जाएगी. दरअसल उन्हें कुछ हिस्से में कमर्शियल की परमिशन दी जाएगी और बाकी के लिए मजदूरों के लिए आरक्षित रहेगा लेकिन हाउसिंग फॉर ऑल में किराए की नीति मुख्य रूप से हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से काम करेगी.

वाउचर स्कीम के अंतर्गत चलेगी ये खास योजना

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार की यह योजना वाउचर स्कीम के तहत चलाई जाएगी. जी हां, दरअसल इसमें शहरी या लोकल बॉडी सबसे पहले 3 लाख से कम आमदनी वालों का रजिस्ट्रेशन करेगी. इसके बाद उन्हें वाउचर बांटे जाएंगे. दरअसल किराएदार इन वाउचर्स को हाउसिंग बोर्ड में देगा. जबकि निजी डेवलेपर के मामले में, किराया वाउचर किसी भी नागरिक सेवा ब्यूरो में रिडीम किए जाएंगे.

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