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गाय का गोबर और गौमूत्र बढ़ाएगा किसानों की आमदनी, खर्च घटेगा और मुनाफा बढ़ेगा, जानिए कैसे

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पिछले कुछ सालों से गाय की काफी बात हुई है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से कई राजनीतिक बहस का केंद्र भी गाय ही रही है हालांकि अब यही गाय किसानों का उद्धार करने के काम आएगी. जी हां, दरअसल एक तरफ किसान दूध बेचकर पैसा कमा सकेंगे तो दूसरी ओर गोमूत्र से खाद और कीटनाशक भी बना सकेंगे.

दरअसल गोमूत्र फायदा करता है या नहीं, यह हमेशा बहस का मुद्दा रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग ने बाकायदा लिखित में यह बात कही है कि गोमूत्र कैसे खेती-किसानी में काम आएगा. मालूम हो कि किसान घर बैठे कैसे इसका कीटनाशक बनाकर कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं. जाहिर है कि इससे किसानों को कीटनाशक पर खर्च घटेगा और उनकी आमदनी भी बढ़ेगी.

दरअसल कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो पौधे की बढ़त यदि रासायनिक खाद से ही संभव होता तो सारे जंगल सूख गए होते. लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ. दरअसल इसका मतलब साफ है कि मिट्टी में पौधों के लिए जरूरी तत्व पहले से ही मौजूद हैं. इन्हें गाय के गोबर और गोमूत्र से एक्टिव किया जा सकता है.

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के मुताबिक गोमूत्र और गोबर सस्ती एवं सर्वश्रेष्ठ खाद है. दरअसल यह जमीन की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखती है. गोबर एवं गोमूत्र की खाद से पैदा होने वाली सब्जियां और फसल रासायनिक खाद के मुकाबले स्वास्थ्य वर्धक होती हैं. इसका इस्तेमाल करके आप कीटनाशक के जहर से बच जाते हैं.

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मालूम हो कि विभाग तो यह भी दावा करता है कि कृषि वैज्ञानिक इस बात पर एकमत हैं कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से नष्ट हुई जमीन की उपजाऊ शक्ति का एकमात्र विकल्प गोबर और गोमूत्र की खाद है.

बता दें कि कृषि वैज्ञानिक साकेत कुशवाहा के अनुसार गाय का गोबर और गोमूत्र खेती के लिए लाभदायक है, यह कई शोधों में साबित हो चुका है. हालांकि इसमें आगे और रिसर्च करने की भी आवश्यकता है.

रोग रहित होगा पौधा

आपको बता दें कि कृषि विभाग के अनुसार भारतीय नस्ल की देसी गाय के एक लीटर गोमूत्र को एकत्रित कर 40 लीटर पानी में घोलकर यदि दलहन, तिलहन और सब्जी आदि के बीज को 4 से 6 घंटे भिगो कर खेत में बुवाई की जाती है तो बीज का अंकुरण अच्छा, जोरदार एवं रोग रहित होता है और साथ ही बीज जल्दी जमता है.

दरअसल इसके इस्तेमाल से जमीन के लाभकारी जीवाणु बढ़ते हैं और साथ ही जो खराब जमीन है वो ठीक हो जाती है. इससे सिंचाई के लिए कम पानी की जरूरत पड़ती है. क्योंकि जमीन की बारिश का पानी सोखने और रोकने की क्षमता बढ़ जाती है. बता दें कि गोमूत्र कीटनाशक से फसल हरी-भरी हो जाती है और रोगों का प्रकोप कम होता है.

किसान अपने घर पर ही ऐसे बना सकते हैं कीटनाशक

मालूम हो कि गोमूत्र एवं तंबाकू की सहायता से भी कीटनाशक तैयार किया जाता है. जी हां, दरअसल इसके लिए 10 लीटर गोमूत्र में एक किलो तंबाकू की सूखी पत्तियों को डालकर उसमें 250 ग्राम नीला थोथा घोलकर 20 दिन तक बंद डिब्बे में रख देते हैं. फिर इसके एक लीटर में 100 लीटर पानी मिलाकर घोल का छिड़काव करने से फसल का बालदार सूंडी से बचाव हो जाता है. बता दें कि इसका छिड़काव दोपहर में करना चाहिए.

किसान अपना सकते हैं इस विधि को भी

आपको बता दें कि कृषि अधिकारियों के मुताबिक गोमूत्र और लहसुन की गंध के साथ कीटनाशक बनाकर रस चूसने वाले कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है. मालूम हो कि इसके लिए 10 लीटर गोमूत्र में 500 ग्राम लहसुन कूटकर उसमें 50 मिलीलीटर मिट्टी का तेल मिला देते हैं.

फिर मिट्टी के तेल और लहसुन के पेस्ट को गोमूत्र में डालकर 24 घंटे वैसे ही पड़ा रहने देते हैं. इसके बाद इसमें 100 ग्राम साबुन अच्छी तरह मिलाकर और हिलाकर महीन कपड़े से छान लेते हैं. बता दें कि 1 लीटर इस दवा को 80 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव से फसल को चूसक कीटों सुरक्षित रखा जा सकता है.

आपको बता दें कि गोमूत्र और नीम की पत्तियों से भी कीटनाशक बनता है और वह फसल को कई प्रकार के रोगों से बचाने में काम आता है. मालूम हो कि बूढ़ी गाय का मूत्र ज्यादा लाभदायक होता है. बता दें कि सिक्किम में किसान इसका इस्तेमाल करने लगे हैं.

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