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अब जल्द ही बाजार में मिलेंगे जूट पल्प से बने सेनेटरी नैपकिन, किसानों को होगा फायदा, महिलाओं को मिलेगा रोजगार

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सैनेटरी नैपिकन्स से संबंधित एक महत्वपूर्ण खबर आई है। जी हां, दरअसल अब बाजार में जूट पल्प से बने सैनेटरी नैपिकन्स मिल सकते हैं। आपको बता दें कि फिलहाल देश में आयात किए हुए वुड पल्प को नैपकिन बनाने के लिए कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

मालूम हो कि टेक्सटाइल मंत्रालय को उम्मीद है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित होने वाले जूट के पल्प से नैपकिन बनाने से 2 तरह के फायदे होंगे। एक ये कि किसानों को अच्छा मुनाफा कमाने में मदद मिलेगी और दूसरा ये कि महिलाओं के लिए रोजगार का सृजन भी उपलब्ध होगा।

1 लाख नैपकिन रोजाना बन सकेंगे

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मंत्रालय ने National Jute Board के जरिए Indian Jute Industries’ Research Association यानी कि IJIRA को जूट आधारित कम कीमत वाले सैनेटरी नैपकिन बनाने का प्रोजेक्ट स्पॉन्सर किया था।

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बता दें कि अब सरकार इस प्रोजेक्ट में किसानों को भी शामिल करना चाहती है। जी हां, दरअसल मंत्रालय के मुताबिक, फिलहाल इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत रोजाना 1 लाख जूट सैनेटरी नैपकिन बनाए जाने की उम्मीद है। दरअसल सरकार ने कहा कि यह प्रोजेक्ट जूट किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर रकम दिलाने में मदद करेगा और महिलाओं के लिए रोजगार के मौके पैदा होंगे।

चीन और अमेरिका के कच्चे माल से बनते हैं नैपकिन

दरअसल सरकार के मुताबिक बाजार में मिलने वाले अधिकतर सैनेटरी नैपकिन अमेरिका और चीन से आयात किए जाने वाले वुड पल्प से बनाए जाते हैं। मंत्रालय की मानें तो IJIRA ने जूट पल्प से जो नैपकिन तैयार किए हैं, उसमें जूट के रेशे और जूट की लकड़ी का सही अनुपात में इस्तेमाल किया गया है। बता दें कि इन सैनेटरी नैपकिन्स को कोलकाता के National Test House द्वारा सर्टिफाई किया गया है।

जूट पल्प है 40% तक सस्ता

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जूट की पैदावार रिन्युएबल रिसोर्स से होती है। दरअसल पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल होने वाले वुड पल्प से जूट पल्प की लागत 30 से 40% कम होती है। वहीं सालाना उत्पादित होने वाले जूट फाइबर में से 12-13% और जूट की लकड़ी में से सिर्फ 6-7% उत्पादन देश की कुल सैनेटरी नैपकिन की जरूरत को पूरा करने के लिए काफी होगा।

आपको बता दें कि नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 के मुताबिक देश में 15 से 24 वर्ष की उम्र वाली 57.6% महिलाएं माहवारी के दौरान नैपकिन या टैम्पॉन जैसे हाईजीनिक उत्पाद इस्तेमाल करती हैं।

मालूम हो कि देश में 7 राज्यों के तकरीबन 83 जिलों में जूट की पैदावार होती है। यह राज्य हैं- पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा और मेघालय। अकेले पश्चिम बंगाल में ही कुल जूट उत्पादन का 59% उत्पादित होता है।

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