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अब आपके स्मार्टफोन से कभी गायब नहीं होंगे नेटवर्क, बिजली के टावरों पर बनाए जाएंगे मोबाइल स्टेशन

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अगर आप भी ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं और मोबाइल नेटवर्क की समस्या से परेशान हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। जी हां, दरअसल अब ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के फोन का नेटवर्क गायब नहीं होंगे। आपको बता दें कि सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन यानी कि सीईआरसी ने पावर ग्रिड को अपने टावरों को टेलीकॉम कंपनियों को बेस ट्रांस रिसीवर स्टेशनयानी कि बीटीएस स्थापित करने की अनुमति दे दी है।

पावर ग्रिड की आमदनी में होगी बढ़ोतरी

आपको बता दें कि सीईआरसी ने हाल ही में दिए अपने फैसले में कहा है कि देश में ग्रामीण इलाकों में टेलीकॉम कवरेज में बढ़ोतरी होगी, साथ ही पावर ग्रिड की आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी। दरअसल बिजली के टावरों के इस्तेमाल से होने वाली आय का एक हिस्सा वितरण कंपनियों को मिलेगा और इससे कंपनियों को उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बोझ में कमी आएगी।

मालूम हो कि सीईआरसी ने कहा है कि यह याचिका अधिनियम के प्रस्तावों के विपरीत नहीं है और यही कारण है कि हम याचिकाकर्ता को यह व्यवसाय करने की अनुमति दे रहे हैं। यहां आपको बता दें कि पावर ग्रिड ने बिजली वितरण के ढांचे का इस्तेमाल दूरसंचार के उद्देश्य से इस्तेमाल करने के लिए सीईआरसी से अनुमति मांगी थी।

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बिजली और टेलीकॉम कंपनियां 50-50% हिस्सेदारी शेयर करेंगी

मालूम हो कि सीईआरसी की ओर से इसके लिए रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल भी तय कर दिया गया है। जी हां, दरअसल सीईआरसी ने कहा है कि सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष खर्चों को काटने के बाद टेलीकॉम और बिजली कंपनियां कुल राजस्व का 50-50 % हिस्सेदारी शेयर करेंगी।

बता दें कि पावर ग्रिड के पास करीब 1.5 लाख हाईवोल्टेड ट्रांसमिशन टावर हैं जो मोबाइल टावर एंटीना या बीटीएस स्थापित करने के लायक हैं। दरअसल यह ट्रांसमिशन लाइन टावर पूरे देश में फैले हैं जो सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं।

डीजल जनरेटर से भी मिलेगी आजादी

दरअसल ऐसा अकसर होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता नहीं होती है ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों को डीजल के जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे ऑपरेशनल लागत बढ़ती है और कार्बन का अधिक उत्सर्जन होता है। बता दें कि पावर ग्रिड के टावरों पर 99.5 % से ज्यादा बिजली की उपलब्धता रहती है। ऐसे में इन पर स्थापित किए जाने वाले मोबाइल टावर या बीटीएस स्टेशन के लिए डीजल जनरेटर की आवश्यकता भी नहीं रहेगा।

वहीं, इसके अलावा मोबाइल ऑपरेटर्स को जमीन की लीज, टावर का निर्माण समेत कई अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। लेकिन इस फैसले के बाद टेलीकॉम ऑपरेटर्स को यह समस्याएं भी नहीं होंगी। बता दें कि बीटीएस स्टेशन जमीन से 7 से 8 मीटर ऊपर स्थापित किए जाएंगे, ताकि बाढ़ आदि जैसी आपदा में उन पर कोई प्रभाव ना पड़े।

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