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फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग चाहते हैं लॉग इन से नहीं बल्कि ब्लॉकचेन आईडेंटिटी से खुले फेसबुक अकाउंट

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हो सकता कि ऐसा समय भी आ जाए जब आपको फेसबुक पेज पर जाने के लिए फेसबुक लॉग इन की जगह ब्लॉकचेन आइडेंटिटी का इस्तेमाल करना पड़े। जी हां, दरअसल फोर्ब्स में छपी खबर के मुताबिक हाल ही में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने हार्वर्ड के लॉ प्रोफेसर से यह इच्छा जाहिर की थी।

मालूम हो कि जुकरबर्ग चाहते हैं कि फेसबुक पर जाने के लिए यूजर्स फेसबुक लॉग इन की जगह ब्लॉकचेन आइडेंटिटी का इस्तेमाल करें। बता दें कि इन दिनों विश्व की 50 बड़ी कंपनियां तेजी से ब्लॉकचेन प्रणाली को अपनाने में लगी है जो दुनिया भर में पैसे के लेन-देन के तरीकों को बदल देगी। बता दें कि इन कंपनियों में अमेजन, मास्टरकार्ड, माइक्रोसॉफ्ट, सिटी ग्रुप, आईबीएम, एचटीसी, जेपी मॉर्गेन, फेसबुक भी शामिल हैं।

स्मार्टफोन स्कैन कर खरीदें बीयर

मालूम हो कि इस ब्लॉकचेन की बदौलत फ्लाइट लेट होने पर आपके स्मार्टफोन पर नोटिफिकेशन आएगा और अपना बैंक अकाउंट नंबर डालते ही फ्लाइट के इंश्योरेंस के तहत मिलने वाली राशि आपके खाते में आ जाएगी। बता दें कि ठीक वैसे ही, सिर्फ ड्राइविंग लाइसेंस का डिटेल देकर और अपने स्मार्टफोन को स्कैन करके आप बीयर खरीद सकेंगे।

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दरअसल फोर्ब्स में छपी खबर के मुताबिक म्युनिख की एलियांजेसे कंपनी ब्लॉकचेन के माध्यम से फ्लाइट की मिनट की देरी से पहले आपके खाते में फ्लाइट डिले इंश्योरेंस का पेमेंट भेज रही है। इसके अलावा वहीं अफ्रीका की कंपनी बूश इंबेव सिर्फ स्मार्टफोन को स्कैन करने से बीयर दे रही है। दरअसल में इस प्रकार की इंस्टेंट एवं सुरक्षित सुविधा ब्लॉकचेन के माध्यम से संभव हो पा रही है।

मास्टरकार्ड ने किया है 80 पेटेंट के लिए अप्लाई

आपको बता दें कि फोर्ब्स के मुताबिक मास्टरकार्ड ने तो ब्लॉकचेन से संबंधित 80 पेटेंट के लिए अप्लाई किया है। जी हां, दरअसल ब्लॉकचेन के माध्यम से मास्टरकार्ड अमेजन के साथ मिलकर एक ऐसे तरीके को विकसित कर रही है जिसके माध्यम से अमेजन से जींस खरीदने वाले यह आसानी से जान पाएंगे कि उनकी जींस कहां बनी है।

उसी प्रकार वीजा ने ब्लॉकचेन से संबंधित 50 पेटेंट के लिए अप्लाई किया है। दरअसल वीजा तो बिजनेस टू बिजनेस (बी2बी) सेवा शुरू करने जा रही है जो ब्लॉकचेन की मदद से विश्व के किसी भी देश की कंपनी का वेरिफिकेशन करने में बैंकों की मदद करेगी।

जानिए क्या है ये ब्लॉकचेन

आपको बता दें कि ब्लॉकचेन के तहत इस चेन से जुड़े सभी कंप्यूटर में हर ट्रांजेक्शन की जानकारी होगी। जी हां, दरअसल अभी किसी बैंक में ट्रांजेक्शन करने पर उस बैंक के अंदर या ग्राहक को उस ट्रांजेक्शन की जानकारी होती है। मालूम हो कि ब्लॉकचेन के तहत अगर दूसरे बैंक के कंप्यूटर उस चेन जुड़े हैं तो वहां भी उस ट्रांजेक्शन की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध होगी।

बता दें कि इस टेक्नोलॉजी की खासियत दरअसल यह है कि ट्रांजेक्शन के रिकार्ड से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है और एक बार ट्रांजेक्शन की कार्रवाई हो जाने पर उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

जी हां, दरअसल किसी प्रकार के बदलाव के लिए फ्रेश इंट्री करनी होगी। बता दें कि ब्लॉकचेन हेराफेरी खत्म होने के साथ कारोबारी ग्राहकों के समय और पैसे की बचत होगी। मालूम हो कि विदेश में स्थित बैंक की शाखाएं ब्लॉकचेन से जुड़ जाने पर वहां भी किसी प्रकार की हेराफेरी नहीं की जा सकेगी।

भारत में फिनटेक का पार्ट होगा ब्लॉकचेन

मालूम हो कि भारत में भी ब्लॉकचेन सिस्टम पर काम चल रहा है। दरअसल ब्लॉकचेन यहां फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी यानी कि फिनटेक का पार्ट होगा। दरअसल इससे बैंकिंग व्यवस्था हाईटेक हो जाएगी। बता दें कि आरबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक बैंकिंग सिस्टम में फिनटेक के तहत मुख्य रूप से 3 चीजें इस्तेमाल होंगी।

जी हां, और वो हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन व इंटरनेट ऑफ थिंग्स। बता दें कि एआई के तहत आने वाले समय में बैंकों में ग्राहक सेवा व उनकी मदद के लिए रोबोटिक सहायक होंगे। दरअसल रोबोटिक सहायक का इस्तेमाल मुख्य रूप से बैंकों की बड़ी शाखाओं में किया जाएगा, जहां काफी अधिक संख्या में ग्राहक आते हैं।

आपको बता दें कि ये रोबोटिक सहायक ग्राहकों को बैंकिंग ट्रांजेक्शन में उनकी मदद करेंगे। दरअसल मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, एआई के इस्तेमाल से बैंक को अपने ग्राहकों को मैनेज करने में काफी आसानी होगी और इससे लागत में कमी आएगी।

बैंकों को अब हर हाल में अपनाना होगा फिनटेक

आपको बता दें कि वित्त मंत्रालय का दरअसल यह मानना है कि फिनटेक को अगर बैंकिंग सिस्टम में नहीं अपनाया गया तो सरकारी बैंक बैंकिंग की दौड़ में पीछे रह जाएंगे। जी हां, दरअसल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी कि आरबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013-14 के बीच फिनटेक इंडस्ट्री में 282 % की बढ़ोतरी हुई और 2015 तक फिनटेक का कारोबार 45 करोड़ डॉलर का हो गया।

आपको बता दें कि भारत में 400 फिनटेक कंपनियां काम कर रही हैं। मालूम हो कि वर्ष 2020 तक इनके कारोबार में 170 % की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है।

वहीं नैसकॉम के अनुमान के मुताबिक भारत का फिनटेक साफ्टवेयर मार्केट वर्ष 2020 तक 2.4 अरब डॉलर का हो जाएगा। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 के मध्य तक 40 % आबादी बैंक से नहीं जुड़ी हैं और 87 % पेमेंट नकद में हो रहा है।

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