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अगर हो गया ये फैसला तो पाकिस्तान हो जाएगा पाई-पाई को मोहताज, उड़ जाएगी पाकिस्तानियों की नींद

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इन दिनों पाकिस्तान की हालत खराब है।महंगाई ने वहां के आम आदमी की कमर तोड़ रखी है और प्रधानमंत्री इमरान खान की नींद पूरी तरह से उड़ चुकी है. दरअसल इसके पीछे की वजह पाकिस्तान में बढ़ रही महंगाई नहीं बल्कि कुछ और ही है.

जी हां, दरअसल उनका सबसे बड़ा डर अगले हफ्ते होने वाली एक खास बैठक है. बता दें कि इस बात का अंदाजा उन्हें हालिया बयानों से पता लगने लगा है. याद हो कि इमरान खान ने देश के नाम संबोधन में कहा हैं कि 10 साल में पाकिस्तान का कर्ज़ 6000 अरब पाकिस्तानी रुपए से बढ़कर 30 हज़ार अरब पाकिस्तानी रुपए तक पहुंच गया है.

इमरान ने आगे कहा था कि इससे देश के पास अमेरिकी डॉलर की कमी हो गई. हमारे पास इतने डॉलर नहीं बचे कि हम अपने कर्ज़ों की किस्त चुका सकें. मुझे डर हैं कि कहीं पाकिस्तान डिफॉल्टर ना हो जाए.

दरअसल आपको बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों पर एक्शन लेने में नाकाम रहा पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी कि FATF द्वारा ब्लैकलिस्ट हो सकता है.

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जी हां, दरअसल आतंकी संगठनों पर कड़ी कार्रवाई नहीं करने पर पाकिस्तान पहले से ही FATF की ग्रे लिस्ट में है. इसके बाद पाकिस्तान को जैश और लश्कर के खिलाफ कार्रवाई करने का वक्त दिया गया था और उसे 27 एक्शन प्लान बताए गए थे.

16-21 जून के बीच होगा बड़ा फैसला

आपको बता दें कि एफएटीएफ की अगली बैठक ओरलैंडों में 16 जून से 21 जून के बीच होगी. जी हां, दरअसल यहां पर पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है. यही कारण है कि पाकिस्तान एक बार फिर से इस मीटिंग में अपने बचाव के लिए जवाब तैयार कर रहा है. आपको बता दें कि अगर पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट हो जाता है. उसे कोई भी बड़ी संस्था कर्ज़ नहीं देगी. ऐसे में उसके डिफॉल्ट होने का खतरा बढ़ जाएगा.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को सता रहा है डर

मालूम हो कि पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने अपने हालिया बयान में कहा है कि पाकिस्तान बुरे हालात से गुज़र रहा है. ऐसे में अगर फंडिंग रुक गई तो देश डिफॉल्ट हो जाएगा. इसका मतलब साफ है कि बोरियों में रुपए भरकर ले जाते तो रोटियां मिलतीं. हमारा हाल भी वेनेज़ुएला वाला हो जाता. इसलिए जब से सरकार में आया हूं तब से इसी दबाव में रहा हूं. शुक्र है कि हमारे दोस्त मुल्क यूएई, सऊदी अरब और चीन से से मदद मिली.

आखिर क्या है FATF

आपको बता दें कि यह दुनिया भर में आतंकी संगठनों को दी जाने वाली वित्तीय मदद पर नजर रखने वाली इंटरनेशनल एजेंसी है. जी हां, दरअसल यह एशिया-पैसिफिक ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग, जनसंहार करने वाले हथियारों की खरीद के लिए होने वाली वित्तीय लेन-देन को रोकने वाली संस्था है. बता दें कि इस संस्था की रिपोर्ट के आधार पर FATF कार्रवाई करती है.

अब ये होगा

आपको बता दें कि एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान पहले से शामिल है. ऐसे में अगर वो इस लिस्ट से बाहर आना चाहता हैं तो उसे FATF के 36 में से 15 सदस्यों का वोट चाहिए होंगे.

वहीं, ब्लैकलिस्ट होने से रोकने के लिए कम से कम 3 सदस्यों का वोट चाहिए. मालूम हो कि ओरलैंडों में होने वाली बैठक में पाकिस्तान पर की जाने वाली कार्रवाई पर भले ही मुहर लग जाए.

लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा पेरिस में अक्टूबर में होने वाली FATF की बैठक में की जाएगी. बता दें कि ये बैठक 18 से 23 अक्टूबर के बीच होने वाली है.

अगर पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट हुआ तो क्या होगा

आपको बता दें कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने एक प्रस्ताव पेश कर जून 2018 में पाकिस्तान के FATF के ग्रे लिस्ट में डाल दिया था. अब ऐसे में अगर पाकिस्तान को FATF ब्लैकलिस्ट कर देता है तो पाकिस्तान पर इसके बहुत बड़े असर होंगे.

बता दें कि ब्लैक लिस्ट होने पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी कि IMF से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के कर्ज पर भी रोक लगाई जा सकती है.

दरअसल आईएमएफ पहले ही कह चुका हैं कि पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ वास्तविक कदम उठाने चाहिए. यानी कि इसका मतलब यह हुआ कि अगर पाकिस्तान को IMF से लोन चाहिए तो उसे FATF से क्लियरेंस लेना आवश्यक है.

इतना ही नहीं इसके अलावा कई और बड़ी संस्थाएं भी पाकिस्तान को फंडिंग से मना कर सकती है. जी हां, ऐसे में ये साफ है कि पाकिस्तान पाई-पाई को मोहताज हो जाएगा.

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