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स्मार्टफोन कंपनियां प्रो वर्जन के नाम पर ग्राहकों को दे रही है धोखा

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ये तो हम सब जानते ही हैं कि भारत एक बड़ा मार्केट है और यही कारण है कि यहां स्मार्टफोन मार्केट बहुत कम समय काफी हद तक फैल गया है। जी हां, ओपो से लेकर शाओमी, वीवो और वन प्लस जैसे सभी स्मार्टफोन्स ने अपने बेस मॉडल्स के प्रो वर्जन पेश किए हैं। दरअसल यह सभी ब्रांड्स दावा करते हैं कि अधिक कीमत वाले प्रो वर्जन में बेहतर फीचर मिलते हैं।

दरअसल इससे कंपनियों के लिए एक अलग सेगमेंट तैयार हो गया है, जिसका सभी स्मार्टफोन कंपनियों फायदा उठाती हैं। हालांकि इस विषय में एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत में अब तक लॉन्च हुए अधिकतर प्रो वर्जन में उनके बेस वर्जन के मुकाबले बेहतर कैमरे जैसे मामूली बदलाव ही किए गए हैं, लेकिन इनके दाम 50 % बढ़ा दिए गए हैं।

दरअसल एनालिस्ट्स के मुताबिक यह स्ट्रैटेजी बैकफायर कर सकती है जिससे ब्रांड्स की वैल्यू को नुकसान पहुंचने की पूरी संभावना है।

वन प्लस एवं वीवो ने भी किया एनालिस्ट्स की चिंताओं का खंडन

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मालूम हो कि शाओमी ने इसका बचाव करते हुए कहा है कि नाम बदलने (बेस वर्जन के नाम में कोई अक्षर जोड़ कर प्रो वेरिएंट को अलग पहचान देने का तरीका) से खरीदारों के लिए दोनों वेरिएंट में अंतर समझ में आता है और उनके लिए सही चुनाव करना आसान हो जाता है।

बता दें कि कम बदलाव के लिए ज्यादा कीमत लगाए जाने की बात का जवाब देते हुए शाओमी के प्रवक्ता ने बताया, ‘काफी कुछ इंडस्ट्री के ट्रेंड पर निर्भर करता है। अगर मार्केट में कैमरा का चलन सबसे ज्यादा है तो ब्रांड्स इसे ही अपना यूएसपी बनाएंगे।’

वहीं वन प्लस और वीवो ने भी प्रो स्ट्रैटेजी का बचाव किया और एनालिस्ट्स की चिंताओं का खंडन किया। हालांकि ओपो और रियलमी ने इस विषय पर अभी तक कोई कमेंट नहीं किया। वहीं स्मार्टफोन की बड़ी कंपनियों में शामिल सैमसंग का कोई प्रो मॉडल नहीं है।

डुअल फ्लैगशिप स्ट्रैटेजी से रिश्ता और होगा मजबूत- विकास अग्रवाल

आपको बता दें कि वन प्लस इंडिया के हेड विकास अग्रवाल ने इस संबंध में अपने विचार व्यक्त किए और बताया कि, ‘डुअल फ्लैगशिप स्ट्रैटेजी से हमें अपने कोर यूजर बेस से रिश्ता मजबूत करने में मदद मिलेगी और साथ ही ब्रांड नए प्रीमियम यूजर्स से जुड़ सकेगा।’

वहीं वीवो इंडिया के ब्रांड स्ट्रैटेजी डायरेक्टर निपुण मौर्य ने बताया कि कंपनी का नॉन-प्रो वर्जन उन खरीदारों के लिए है जो फ्लैगशिप डिवाइस जैसी इनोवेशन सस्ते दामों में पाना चाहते हैं।

उधर हुआवे ने कहा कि इसकी इनोवेशन कस्टमर डिमांड पर निर्भर करती है। दरअसल इस चीनी कंपनी ने बताया, ‘हालांकि कस्टमर डिमांड बदलती रहती है और इसकी स्थिरता का अनुमान लगाना मुश्किल है।’

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