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अपने हेल्थ इंश्योरेंस का ऐसे करें क्लेम, थोड़ी सी हुई चूक तो हो जाएगा बड़ा नुकसान

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जमाना काफी तेजी से भाग रहा और इस भागदौड़ भरी जीवनशैली में आजकल अधिकांश लोग किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं समय के साथ साथ नई खतरनाक बीमारियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे में अगर स्वास्थ्य बीमा न हो तो अच्छे हॉस्पिटल में इलाज कराने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं।

यही कारण है कि आज हर व्यक्ति को स्वास्थ्य बीमा की जरूरत पढ़ने लगी है। जी हां, दरअसल कई बार तो स्वास्थ्य बीमा होने के बाद भी क्लेम की सही प्रोसेस पता नहीं होने के कारण लोग बीमा का लाभ नहीं ले पाते। इसलिए आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि जब आपको जरूरत हो तो स्वास्थ्य बीमा का क्लेम कैसे किया जाए। चलिए जानते हैं इसके बारे में..

कैशलेस प्रोसेस में नेटवर्क अस्पताल होना जरूरी

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वास्थ्य बीमा का क्लेम दो तरीके से लिया जा सकता है। पहला तरीका कैशलेस है और दूसरा है रिइंबर्समेंट। बता दें कि कैशलेस वाले तरीके में बीमित व्यक्ति का किसी नेटवर्क हॉस्पिटल में भर्ती होना जरूरी होता है। दरअसल यह बहुत आसान तरीका है। मालूम हो कि इसमें बीमित व्यक्ति को सिर्फ अपना क्लेम प्रोसेस शुरू करना होता है और फिर बीमा कंपनी अस्पताल में मरीज का बिल भर देती है।

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रिइंबर्समेंट के लिए खुद भरना होगा पूरा बिल

मालूम हो कि स्वास्थ्य बीमा का क्लेम लेने का दूसरा तरीका है रिइंबर्समेंट। जी हां, दरअसल इसकी खास बात यह है कि, इसमें बीमित व्यक्ति नेटवर्क या नॉन नेटवर्क में से किसी भी तरह के अस्पताल में इलाज के लिए जा सकता है। बता दें कि इस तरीके में पहले बीमित व्यक्ति को अस्पताल का पूरा बिल खुद ही भरना होता है और फिर बाद में बीमा कंपनी बीमित व्यक्ति को पूरे खर्च का भुगतान कर देती है।

क्या है इसका प्रोसेस

इसके लिए सर्वप्रथम आपको अस्पताल की इंश्योरेंस हेल्पडेस्क पर बीमा कंपनी का अपना आईडी कार्ड दिखाना होगा। इसके पश्चात अस्पताल उस बीमा कंपनी के पास प्री-अथॉराइजेशन फॉर्म जमा करेगा। बता दें कि अब आपकी बीमा कंपनी डॉक्यूमेंट्स की जांच करके टर्म्स एंड कंडीशंस के हिसाब से क्लेम प्रोसेस शुरू करेगी।

मालूम हो कि कुछ औपचारिकताओं के बाद क्लेम का सेटलमेंट हो जाता है। इसके अलावा अगर बीमित व्यक्ति को इमरजेंसी में अस्पताल में भर्ती होना पड़े तो ऐसी परिस्थिति में बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर बात करनी चाहिए और फैक्स द्वारा कंपनी को प्री-ऑथराइजेशन फॉर्म भेज देना चाहिए।

इन बातों का रखें खास ख्याल

आपको बता दें कि क्लेम प्रोसेस में कुछ बातों की लापरवाही से काफी अड़चने आ सकती है। जी हां, इसलिए हमेशा ध्यान रखें कि डिस्टार्ज होने के 30 दिनों के अंदर क्लेम के लिए आवेदन कर दें। वहीं अगर आपने अपना अथॉराइजेशन फॉर्म अधूरा भरा है तो आपका क्लेम प्रोसेस रद्द भी हो सकता है।

मालूम हो कि क्लेम प्रोसेस के दौरान अपना हेल्थ कार्ड, डिस्चार्ज समरी, दवाओं के बिल, भरा हुआ क्लेम फॉर्म, सभी जांच रिपोर्ट्स और दुर्घटना की स्थिति में एमएलसी या एफआईआर की कॉपी साथ रखें। दरअसल अगर इन सब बातों का अगर ध्यान रखा जाएगा तो आपके स्वास्थ्य बीमा के क्लेम में कोई अड़चन नहीं आएगी।

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