क्या आप जानते हैं कि ट्रेन टिकट के नंबर, वेटिंग लिस्ट और PNR का मतलब क्या होता है? अगर नहीं तो जानें

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हमारे देश में सबसे ज्यादा लोग रेल से ही सफर करते हैं. इस बात का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि हमारे देश में हर रोज करीब 5 लाख रेल टिकट ऑनलाइन आईआरसीटीसी से बुक होते हैं. वहीं, विंडों से बुक होने वाले टिकटों की संख्या इससे कई गुनी ज्यादा है.

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मालूम हो कि ट्रेन से कहीं भी जाने के लिए सीट/बर्थ की जरूरत पड़ती है. दरअसल बर्थ पाने के लिए रिजर्वेशन कराना पड़ता है. हम से सभी लोगों ने कभी न कभी स्लीपर, एसी, चेयर कार या सेकंड सीटिंग के लिए रिजर्वेशन कराया होगा, लेकिन क्या कभी आपने ये जानने की कोशिश की है कि आपके रेल टिकट में जो लिखा होता है वो क्या होता है.

दरअसल ये जानकारी आपके काम आ सकती है. बता दें कि आज रेलवे से जुड़ी इन्हीं जानकारी के साथ हम आपको रेल टिकट से संबंधित जानकारियां दे रहे हैं, जो आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं. चलिए जानते हैं इनके बारे में..

रिजर्वेशन के क्या हैं तरीके

बता दें कि कई लोगों को आज भी यही लगता है कि रिजर्वेशन सिर्फ टिकट की लाइन में लगकर ही कराया जा सकता है. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि रिजर्वेशन कराने के 3 तरीके होते हैं:

1. टिकट विंडो पर जाकर

2. ऑनलाइन IRCTC की साइट से ई-रिजर्वेशन

3. आई रिजर्वेशन

ई-टिकट क्या होता है

बता दें कई बार लोगों को लगता है कि ई-रिजर्वेशन और आई-रिजर्वेशन एक ही हैं. कई को तो आई-रिजर्वेशन के बारे में पता ही नहीं होता. दरअसल बता दें कि ई और आई रिजर्वेशन दोनों ही ऑनलाइन बुक किए जाते हैं लेकिन, दोनों में थोड़ा अंतर होता है.

जी हां, दरअसल ई-टिकट लेकर यात्रा करते समय आपको आईडी प्रूफ लेकर चलना पड़ेगा. यह टिकट वेटिंग क्लियर नहीं होने पर कैंसिल हो जाता है. बता दें कि यह एक तरह से फेक टिकट होता है.

आई-टिकट क्या होता है

अगर आप भी उनमें से हैं जो फिजिकल टिकट तो चाहते हैं लेकिन टिकट विंडो पर जाने से भी बचना चाहते हैं तो आपको आई-टिकट लेना चाहिए. जी हां, दरअसल इस टिकट के साथ यात्रा करने पर आपको कोई आईडी प्रूफ दिखाने की जरूरत नहीं है. दरअसल आई-टिकट दिए गए पते पर पोस्ट से पहुंचता है.

मालूम हो कि आई-टिकट के लिए यात्रा से 3 दिन पहले बुकिंग करवानी पड़ेगी जबकि ई-टिकट यात्रा के कुछ घंटों पहले भी लिया जा सकता है. बता दें कि आई-टिकट के लिए आपको डाक खर्च भी भरना पड़ेगा जबकि ई-टिकट में आपका काम प्रिंटआउट या एसएमएस से भी चल सकता है.

PNR

अगर आपने कभी भी रेल में सफर किया है तो अपने पीएनआर नंबर के बारे में तो सुना ही होगा. दरअसल पीएनआर नंबर आपकी टिकट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. बता दें कि रिजर्वेशन टिकट के लेफ्ट साइड में ऊपर की ओर यह नंबर होता है.

दरअसल यह नंबर यूनीक होता है और इसे पैसेंजर नेम रेकॉर्ड नंबर कहा जाता है. दरअसल यह टिकट आपका ही है और इस पर आप ही सफर कर रहे हैं या नहीं, इस बात का पता इसी नंबर से लगाया जाता है.

ट्रेन नंबर

आपको बता दें टिकट में जो दूसरा सबसे जरूरी नंबर होता है वह है ट्रेन नंबर. दरअसल इस नंबर के पीछे एक गहरा राज छुपा होता है. जी हां, बता दें कि ट्रेन नंबर आपको ट्रेन रूट की जानकारी देता है. दरअसल अगर आपके रिजर्वेशन टिकट पर लिखे ट्रेन नंबर की पहली डिजिट 0 है तो आप समर स्पेशल, हॉलिडे स्पेशल या अन्य स्पेशल ट्रेन में सफर करने वाले हैं.

इसी प्रकार अगर पहली डिजिट 1 या 2 है तो लंबी दूरी की ट्रेन है जिसमें राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनें भी शामिल हैं. वहीं 3 नंबर से शुरू होने वाले ट्रेन नंबर कोलकाता की लोकल ट्रेनों का होता है. इसी तरह 4 नंबर से शुरू होने वाला ट्रेन नंबर दिल्ली, चेन्नै, सिकंदराबाद जैसे मेट्रो शहरों की रेल सेवाओं का होता है.

इसके अलावा 5 नंबर परंपरागत तरीके की ट्रेनों का होता है. वहीं 6 नंबर से शुरू होने वाली ट्रेनें मेमू होती हैं और 7 नंबर से शुरू होने वाली डेमू. बता दें कि हाल ही में रिजर्व की गई ट्रेन का नंबर 8 होता है और 9 नंबर से शुरू होने वाली ट्रेन मुंबई लोकल की होती हैं.

वेटिंग लिस्ट भी अलग-अलग तरह की होती हैं जिनके बारे में जानना आवश्यक है. चलिए जानते हैं इनके बारे में:

RLWL

बता दें कि इसका फुल फॉर्म होता है रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट. दरअसल यह तब लिखा जाता है जब दो बड़े स्टेशनों के बीच का कोई ऐसा स्टेशन हो जहां से ज्यादा ट्रेनें मौजूद ना हों, ऐसी स्थिती में वहां के यात्री को किसी कैंसलेशन पर पहले सीट दी जाएगी.

CKWL

मालूम हो कि यह सबसे रोचक वेटिंग लिस्ट है. जी हां, दरअसल आपको CKWL में तब रखा जाता है जब आप तत्काल में टिकट लेते हैं. अगर तत्काल में आपको वेटिंग मिली है तो आप CKWL में है. बता दें कि आम तौर पर अगर यह वेटिंग लिस्ट 10 होने पर कंफर्म हो जाती है.

PQWL

आपको बता दें कि PQWL का मतलब होता है पूल्ड कोटा वेटिंग लिस्ट. दरअसल यह वेटिंग लिस्ट एक किसी बड़े क्षेत्र के कई छोटे-छोटे स्टेशनों के लिए होती है. बता दें कि इस वेटिंग लिस्ट को क्लियर होने के लिए अपने कोटे से किसी कैंसिलेशन की जरूरत होती है.

दरअसल इस हिसाब से अगर आप किसी छोटे स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं और आपका टिकट पूल्ड वेटिंग लिस्ट में है तो आपके अपने एरिया (पूल कोड) के किसी व्यक्ति को अपनी टिकट कैंसिल करनी पड़ेगी.

RQWL

इसका मतलब है कि ये है सबसे अखिरी वेटिंग लिस्ट. जी हां, दरअसल इसका मतलब होता है रिक्वेस्ट वेटिंग लिस्ट. दरअसल अगर रूट में कोई पूल्ड कोटा नहीं है तो इस तरह की वेटिंग लिस्ट को बनाया जाता है.

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