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डिजिटल इंडिया के साथ तेजी से बढ़ेगा रोजगार, मेट्रो शहरों के 79% लोगों को है यही उम्मीद

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मोदी सरकार ने ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान से डिजिटल क्षेत्र में क्रांति लाने का काम किया था अब एक बार फिर देश की राजनीति की बागडोर संभालने पर मोदी की सरकार फिर से डिजिटल स्पेस में चमत्कार कर सकती है। जी हां, दरअसल 79% लोगों का यह विश्वास है कि वर्तमान सरकार के अगले 5 साल के कार्यकाल के दौरान डिजिटल इंडिया सभी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाकर, बेरोजगारी को कम करने में महत्वलपूर्ण योगदान देगी।

आपको बता दें कि यह बात विवोकी इंडिया, रिसर्च एनालिटिक्स और नॉलेज प्रोसेसिंग स्टार्टअप द्वारा महानगरों में रहने वाले 5000 लोगों के बीच किये गये लेटेस्टर सर्वे में सामने आई है। दरअसल राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा किये गये आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण को ध्याान में रखते हुए यह आशा अभूतपूर्व है जिसमें रोजगार बाजार में चिंताजनक रुझानों को उजागर करते हुए कहा गया था कि शहर में नौकरी चाहने वालों युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर बढ़ रही है।

बता दें कि इस सर्वेक्षण में सबसे अधिक प्रतिक्रिया सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा के संबंध में आई क्योंकि 82% लोगों ने महसूस किया कि यह दोनों चार्ट में सबसे ऊपर होने चाहिएं।

ई-गवर्नेंस के मामले में दुनिया में 107 वें स्थान पर है भारत

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आपको बता दें कि यह सर्वेक्षण डिजिटल इंडिया-युवा-वर्तमान सरकार की मांग और अपेक्षा को उजागर करने के लिए किया गया था। दरअसल दीपा सयाल, कार्यकारी निदेशक, विवोकी इंडिया और निदेशक और सह-संस्थापक, एडीजी ऑनलाइन सॉल्यूशंस के अनुसार, “ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में सुधार लाने के अथक प्रयास किये जाने के बावजूद संयुक्त राष्ट्र ई-गवर्नेंस इंडेक्स के अनुसार, भारत ई-गवर्नेंस में दुनिया में 107 वें स्थान पर है।”

उन्होंने आगे कहा कि, ” स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और रोजगार, वाणिज्य, आदि से संबंधित क्षेत्रों में लोगों को सशक्त बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी की शुरुआत की दिशा में पहले ही अनेक पहल की गई हैं। हम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या और बेहतर ई-गवर्नेंस में स्पष्ट रूप से अंतर देख सकते हैं। हालांकि फिर भी, भारत के कई हिस्सों में डिजिटल इल्लिटरेसी/निरक्षरता कायम है। दरअसल ‘डिजिटल इंडिया’ तभी एक सफल मुहिम होगी जब इसका लाभ भारत के प्रत्येक नागरिक को मिलेगा”।

डिजिटल साक्षरता बढ़ी तो रोजगार कम होने के डर को संभाला जा सकता है

बता दें कि इसके अलावा, 74% रेस्पोंडेंट का यह मानना है कि यदि वर्तमान सरकार डिजिटल साक्षरता के माध्यम से नागरिकों के सशक्तिकरण और डिजिटल स्किलसेट को यूनिवर्सल एक्सेस दिलाने का कार्य करती है तो रोजगार कम होने के डर को संभाला जा सकता है।

दरअसल डिजिटल इंडिया, भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज बनाने का कार्यक्रम है। आपको याद दिला दें कि डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को 1 जुलाई, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था। यह अभियान भारत सरकार की अन्य प्रमुख योजनाओं जैसे कि मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया और इस प्रकार की अनेक महत्व पूर्ण योजनाओं के लिए काफी लाभदायक है।

बता दें कि 70% शहरी रेस्पोंडेंट को ऐसा लगता है कि मौजूदा सरकार को भविष्य में जीडीपी में योगदान देने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रामीण इंटरनेट भागीदारी को और अधिक बढ़ावा देना चाहिए।

दरअसल रेस्पोंडेंट ने यह भी महसूस किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में GeM बाज़ार की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। जी हां, दरअसल सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी कि GeM, एक नेशनल पब्लिक प्रोक्योरमेंट प्लेबटफार्म के पहले पिछले साल के अगस्त के आंकड़ों से पता चलता है कि मंच पर 6.16 लाख से अधिक लेन-देन के माध्यम से, सकल मर्चेंडाइज वैल्यू में 10,000 Cr से अधिक है।

वहीं दूसरी तरफ 63% रेस्पोंडेंट का यह मानना था कि GEM ई-मार्केटप्लेस बेंचमार्किंग को भारतीय अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए SMB और SME मार्केटप्लेस के लिए सरकार द्वारा बेहतर रूप से श्रेणीबद्व किया जाना चाहिए।

देश को डिजिटल रूप से सशक्त समाज में बदलने है लक्ष्य

दरअसल आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल इंडिया बनाने की सोच देश को डिजिटल रूप से सशक्त समाज में बदलने की है हालांकि जब कैशलेस इकॉनोमी की बात आती है तो रेस्पोंडेंट के विचार अलग हो जाते हैं।

जी हां, दरअसल जब पूछा गया कि ‘क्या वर्तमान सरकार को समग्र CAGR में सुधार करने के लिए भारत की इकोनॉमी को कैशलेस बनाने की दिशा में काम करना चाहिए’, तो केवल 53% रेस्पोंडेंट/प्रतिक्रियादाताओं ने कैशलेस इकॉनोमी का समर्थन किया जबकि 44% इसके खिलाफ थे।

मालूम हो कि नई सरकार को इसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता देने के संबंध में टेली मेडिसिन और मोबाइल हेल्थकेयर सुविधाओं की प्रतिक्रिया भी उदासीन थी क्योंकि केवल 52% उत्तरदाताओं ने हाँ कहा और 38% ने ‘नहीं’ कहा।

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