Loading...

PM किसान निधि स्कीम का उठाया गलत फायदा तो वापस करने होंगे पैसे, फर्जी किसानों पर होगी कार्यवाही

0 22

मोदी सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि काफी फेमस है लेकिन इस स्कीम का लाभ लेने के लिए कुछ लोग गड़बड़ी भी करने लगे हैं. जी हां, दरअसल पता चला है कि पहली किस्त कुछ ऐसे लोगों को भी मिल गई है जो इसके हकदार नहीं हैं. दरअसल ऐसा इसलिए है क्योंकि यह किस्त लोकसभा चुनाव से पहले आनन-फानन में भेजी गई थी और उसका वेरीफिकेशन ढंग से नहीं हो पाया था.

बता दें कि अब ऐसे लोगों से यह रकम वापस ली जा रही है. मालूम हो कि अगर आपने गलत तरीके से इस स्कीम का फायदा उठाया है तो हर हाल में पैसे वापस करने होंगे. जी हां, दरअसल अगर सूत्रों की मानें तो करीब सवा लाख लोगों के अकाउंट में जमा कराई गई रकम सरकार ने वापस ले ली है.

जबकि 1.5 लाख किसानों की किस्तें उनके अकाउंट में भेजने से पहले ही रोक ली गई. वहीं दूसरी तरफ 2.69 लाख किसानों के बैंक अकाउंट और खेत के मालिक के नाम के बीच अंतर पाया गया है.

दरअसल खेती-किसानी के विकास के लिए बनाई गई यह सबसे अहम योजना है. बता दें कि मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में इसी साल 24 फरवरी को इसे शुरू किया था. मालूम हो कि अधिकारियों को योजना के लाभार्थियों का नंबर अधिक दिखाना था इसलिए उस वक्त ठीक से वेरीफिकेशन नहीं किया वरना गड़बड़ी तभी पकड़ी जाती.

Loading...

दरअसल खेत किसी और के नाम है और बैंक अकाउंट किसी और का भेज दिया गया. मालूम हो कि जिन किसानों के नाम और बैंक अकाउंट में मिलान नहीं हुआ उनसे पहली किस्त का पैसा वापस लिया जा रहा है.

गड़बड़ी पर यूं वापस लिया जाता है पैसा

आपको बता दें कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्यों को एक पत्र लिखकर पहले ही कह दिया था कि अगर अपात्र लोगों को लाभ मिलने की सूचना मिलती है तो उनका पैसा कैसे वापस होगा. दरअसल इस योजना के सीईओ विवेक अग्रवाल अगर इतनी बड़ी योजना है तो गड़बड़ी की संभावना हमेशा बनी ही रहती है.

दरअसल अगर अपात्र लोगों के खातों में पैसा ट्रांसफर हुआ तो उसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी कि डीबीटी से वापस लिया जाएगा. मालूम हो कि बैंक इस पैसे को अलग अकाउंट में डालेंगे और राज्य सरकार को वापस करेंगे. इसके बाद राज्य सरकारें अपात्रों से पैसे वापस लेकर https://bharatkosh.gov.in/ में जमा कराएंगी. बता दें कि अगली किस्त जारी होने से पहले ऐसे लोगों का नाम हटाया जाएगा.

1.19 लाख अकाउंट में बिना वेरीफिकेशन जमा हुआ पैसा

आपको बता दें कि इस योजना का पैसा केंद्र सरकार के खाते से किसानों के बैंक अकाउंट में सीधे नहीं जा रहा. जी हां, दरअसल केंद्र सरकार राज्यों के अकाउंट में पैसा भेजती है फिर उस अकाउंट से किसानों तक पैसा पहुंचता है. दरअसल ऐसा बताया जा रहा है कि वेरीफिकेशन करने से पहले ही ऐसे 1.19 लाख बैंक अकाउंट में पहली किस्त जमा हो गई थी. बता दें कि पहली किस्त भेजने के बाद डाटा का वेरीफिकेशन शुरू हुआ और गलती पकड़ में आने लगी.

पहली किस्त मिली 3 करोड़ किसानों को दूसरी सिर्फ 2 करोड़ को

आपको बता दें कि बैंकों को यह निर्देश दिया गया कि वेरीफिकेशन के बिना पैसा रोक लिया जाए. जी हां, दरअसल वेरीफिकेशन की वजह से ही दूसरी किस्त की रफ्तार धीमी है. बता दें कि पहली किस्त 3 करोड़ से अधिक किसानों को मिली है जबकि दूसरी किस्त लगभग 2 करोड़ लोगों तक ही पहुंची है.

मालूम हो कि सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जिन लोगों के नाम 1 फरवरी 2019 तक लैंड रिकॉर्ड में पाया जाएगा वही इसके हकदार होंगे. यानी इसका मतलब यह है कि लाभ उन्हीं किसानों को मिल पायेगा, जिन्हें जमीन का मालिकाना हक हासिल है.

बता दें कि इस गड़बड़ी को खत्म करने के लिए ही सरकार ने तीसरी किस्‍त जारी करने के लिए आधार बायोमेट्रिक को अनिवार्य कर दिया है. दरअसल इन आंकड़ों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार की यही कोशिश है कि असली किसानों को ही इसका लाभ मिले.

किनको नहीं मिलेगा 6000 रुपये का लाभ

आपको बता दें कि निम्नलिखित लोगों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा:

भूतपूर्व या वर्तमान में संवैधानिक पद धारक, वर्तमान या पूर्व मंत्री, मेयर या जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, एमएलसी, लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को इसका फायदा नहीं मिलेगा.

इनके अलावा केंद्र या राज्य सरकार में अधिकारी (मल्टी टास्किंग स्टाफ / चतुर्थ श्रेणी / समूह डी कर्मचारियों को छोड़कर) एवं 10 हजार से अधिक पेंशन पाने वाले किसानों को इसका लाभ नहीं मिलेगा.

साथ ही पेशेवर, डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, वकील, आर्किटेक्ट, जो कहीं खेती भी करता हो उसे इस लाभ का हकदार नहीं माना जाएगा.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.