Loading...

अब ब्लैक मनी रखने वालों पर शिकंजा कसेगी मोदी सरकार, आसानी से उजागर होगा नाम

0 20

ब्लेक मनी को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार को पिछले कार्यकाल में काफी बार घेरा है और यही कारण है इस कार्यकाल में मोदी सरकार इस पर एक्शन लेने के मूड में है। जी हां, दरअसल टैक्स हेवन देशों में काली कमाई छिपाने वाले भारतीयों की अब खैर नहीं है.

आपको बता दें कि मनी लांड्रिंग और आतंकवादियों को वित्त पोषण समेत अघोषित संपत्तियों के लिए एक सुरक्षित जगह माने जाने वाले स्विट्जरलैंड ने अपनी इस छवि को बदलने की कोशिश शुरू कर दी है. जी हां, दरअसल नउसने अपने बैंकों में गलत तरीके से कमाई गई रकम रखने के मामले में कार्रवाई के लिए भारत समेत अन्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है.

आपको बता दें कि यह बात मनी लांड्रिंग रिपोर्टिंग ऑफिस स्विट्जरलैंड यानी कि MROS की सालाना रिपोर्ट से पता चलती है. दरअसल इसमें कई ऐसे मामलों का जिक्र है जहां उसने मनी लांड्रिंग और आतंकवादियों के वित्त पोषण के मामलों का पता लगाने के लिए विदेशी प्राधिकरणों के साथ सहयोग किया है.

मालूम हो कि स्विस मनी लांड्रिंग कानून के तहत एमआरओएस मनी लांड्रिंग के संदर्भ में संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट प्राप्त करता है और उसका विश्लेषण करता है. इसके अलावा अगर जरूरत हुई तो उसे जांच एजेंसियों के पास आगे की पड़ताल के लिये भेजता है.

Loading...

बता दें कि MROS स्विस एजेंसी भी है जिसे अन्य देशों की वित्तीय खुफिया इकाइयां मनी लांड्रिंग और आतंकवादियों के वित्त पोषण को लेकर द्विपक्षीय प्रशासनिक सहायता और सूचना आदान-प्रदान के लिये अनुरोध करती हैं.

दरअसल वर्ष 2018 में एमआरओएस को 104 देशों की 795 एफआईयू से सवाल मिले. बता दें कि यह साल 2017 में 94 देशों से पूछे गये 711 पूछताछ से अधिक हैं. मालूम हो कि एमआरओएस ने इस संबंध में कहा कि विदेशों से मिले अनुरोधों की संख्या साल 2018 में 4,671 रही. दरअसल यह वर्ष 2011 की तुलना में लगभग दोगुनी हो गयी है. हालांकि एमआरओएस ने यह नहीं बताया कि उसे किन देशों से कितने अनुरोध मिले.

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.