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देखिए लेफ्टिनेंट कर्नल की यूनिफॉर्म में कैसे लगते हैं महेंद्र सिंह धोनी

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भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी एवं पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी प्रादेशिक आर्मी का हिस्सा है। साल 2011 में उनको टेरिटोरियल आर्मी में पैराशूट रेजीमेंट में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद रैंक से नवाजा गया। इसके बाद उन्होंने पैरा ट्रेनिंग भी ली। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 9 स्पेशल फोर्स, दो टेरिटोरियल आर्मी और एक राष्ट्रीय राइफल्स की बटालियन पैरा आर्मी के अंतर्गत आती है। यह जवान विशेष परिस्थितियों में ही सेवा करते हैं। पैराशूट रेजीमेंट के जवानों और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इन जवानों एवं अधिकारियों को बंधक संकट से निपटने और प्लेन हाईजैक असफल करने की ट्रेनिंग भी मिलती है।

हाल ही में महेंद्र सिंह धोनी के ग्लब्स पर आईसीसी ने आपत्ति जताई। यह मामला काफी आगे बढ़ गया जिसका लोगों ने विरोध किया है।

बीसीसीआई और आईपीएल के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने भी महेंद्र सिंह धोनी का सपोर्ट किया। बीसीसीआई के सीओए विनोद राय ने बताया कि इस बारे में बोर्ड द्वारा आईसीसी को एक पत्र लिखा गया है।

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राजीव शुक्ला ने बताया कि धोनी ने ग्लब्स पर सेना के बलिदान का बैज लगाकर आईसीसी के किसी रूल का उल्लंघन नहीं किया।

भारतीय प्रशंसकों ने भी महेंद्र सिंह धोनी का पूरा समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि महेंद्र सिंह धोनी को बलिदान बैज लगाकर ही खेलना चाहिए।

लेकिन आईसीसी ने निर्देश दिया है कि महेंद्र सिंह धोनी को अपने ग्लब्स पर से बलिदान बैज हटाना होगा।

ट्विटर पर भारतीय प्रशंसकों ने आईसीसी को अपना निशाना बनाया और महेंद्र सिंह धोनी का पूरा समर्थन किया।

उन्होंने कहा है कि यदि आईसीसी को पाकिस्तानी क्रिकेटर्स के मैदान पर नमाज पढ़ने से कोई समस्या नहीं होती है तो उन्हें धोनी के ग्लब्स पर बलिदान बैज से क्या समस्या है।

प्रशासकों की समिति (सीओए) के प्रमुख विनोद राय ने भी महेंद्र सिंह धोनी का सपोर्ट किया है।

उन्होंने कहा कि वे अपने खिलाड़ी का समर्थन कर रहे हैं। महेंद्र सिंह धोनी ने कोई भी गलत काम नहीं किया है। वह धार्मिक या वाणिज्यिक चिन्ह (प्रतीक) नहीं है।

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