चीन के जाल में बुरी तरह फंसा चुका था ये पड़ोसी देश, मोदी ने 10 हजार करोड़ रु देकर उबारा था संकट से

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मोदी सरकार की विदेश नीति कमाल की रही है और इस बात पर उनकी काफी तारीफ एक्सपर्ट्स के द्वारा समय समय पर होती रही है। इसी का एक उदाहरण है भारत का एक पड़ोसी देश मालदीव। जी हां, मालदीव जो एक वक्त चीन के कर्ज के जाल में बुरी तरह फंस चुका था उसे बचाने के लिए पीएम मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में 1.40 अरब डॉलर यानी 10 हजार करोड़ रुपए का पैकेज दिया था।

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आपको बता दें कि इससे मालदीव की तात्कालिक आर्थिक जरूरतें पूरी हुई। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, मालदीव पर चीन का 3 अरब डॉलर या 21 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था। मुस्लिम बाहुल्य आबादी वाला यह देश मदद के लिए भारत, सऊदी अरब और अन्य देशों की ओर देख रहा है।

याद दिला दें कि मालदीव ने अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए यह कर्ज लिया था और इन प्रोजेक्ट्स को चीन की कंस्ट्रक्शन कंपनियां ही पूरा कर रही हैं।

हिंद महासागर की सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है मालदीव

मालूम हो कि मालदीव को भारत के नियंत्रण वाले हिंद महासागर की सुरक्षा के लिहाज से खासा अहम माना जाता रहा है। दरअसल चीन हिंद महासागर के छोटे देशों में अपने नौसौनिक अड्डे बनाने के लिए लुभाता रहा है। ऐसा इसलिए ताकि उसे भारत की घेराबंदी करने में आसानी हो। दरअसल इसी के चलते मालदीव में नई सरकार की ताजपोशी नवंबर महीने में हुई थी।

भारत के लिए मालदीव कितना अहम है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि नई सरकार की ताजपोशी में शामिल होने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी रातोंरात वहां पहुंच गए थे। बता दें कि प्रधानमंत्री के तौर पर यह मोदी का पहला मालदीव दौरा था। यही कारण है कि पीएम मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दौरे के रुप में भी मालद्वीव को चुना।

पिछली सरकार पर लगे थे चीन से भारी कर्ज लेने के आरोप

आपको बता दें कि मालदीव की आबादी लगभग 4 लाख है। मालदीव को अपने सफेद रेत के समुद्र तटों और नीले पानी के लिए जाना जाता है। दरअसल यामीन सरकार के दौरान मालदीव के चीन के कर्ज के जाल में फंसने के आरोप लग रहे थे, जिसके चलते सोलिह को राष्ट्रपति चुनाव में यामीन को शिकस्त देने में मदद मिली।

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