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अब ज्यादा से ज्यादा लोग करना चाहेंगे खेती, मोदी सरकार ने बनाया ये खास नया प्लान

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मोदी सरकार ने अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करते ही सबसे पहले देश के किसानों के लिए तोहफा दिया था. दरअसल मोदी सरकार देश के किसानों को फायदा पहुंचाने की हर संभव कोशिश कर रही है. यही कारण है कि फसल बीमा का दायरा बढ़ाने के लिए सरकार जल्द ही डाकघरों में भी फसल बीमा लेने की सुविधा का प्लान कर रही है.

जी हां, आपको बता दें कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने योजना को 100 दिनों के भीतर यह योजना शुरू करने का लक्ष्य रखा है. दरअसल मंत्रालय का मानना है कि डाकघरों में यह सुविधा उपलब्ध होने से लाभ लेने वाले किसानों की संख्या दोगुनी हो जाएगी.

मालूम हो कि कृषि मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस योजना की तैयारी वर्ष 2017 में ही हो गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे लागू नहीं किया जा सका. बता दें कि नए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने तय किया है कि जल्द ही फसल बीमा डाकघरों के जरिये मिलेगा.

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इसलिए शुरू की गई थी फसल बीमा योजना

आपको बता दें कि प्राकृतिक आपदा या अनहोनी की स्थिति में खराब हुई फसल के नुकसान से किसानों को बचाने के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी कि पीएमएफबीवाई शुरू की थी. बता दें कि अभी बैंक, सीएससी और ऑनलाइन जैसे माध्यमों से यह बीमा किसानों को दिया जा रहा है, लेकिन इसकी पहुंच चौथाई किसानों तक ही हो सकी है.

ग्रामीण इलाकों में ज्यादा डाकघर होने से किसान ले सकेंगे इसका फायदा

बता दें कि अभी ऑनलाइन पोर्टल के जरिये फसल बीमा पॉलिसी बैंक शाखाओं, बीमा कंपनी के कार्यालय, सहकारी बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर यानी कि सीएससी बेच रहे हैं. बैंक आमतौर पर फसली बीमा की पॉलिसी उन्हीं किसानों की बेचते हैं, जिन्होंने उनके यहां से फसली ऋण लिया है.

यही कारण है कि ऐसे में अधिकतर किसान वंचित रह जाते हैं. दरअसल ऐसा इसलिए है क्योंकि बीमा कंपनी के कार्यालय बेहद सीमित हैं, जबकि सीएससी के अधिकतर कार्यालय शहरी या अर्द्धशहरी इलाकों में हैं और ऑनलाइन पोर्टल तक भी किसानों की पहुंच नहीं है.

इसी वजह से किसानों के लिए डाकघर बेहतर साधन साबित होगा, क्योंकि देश के करीब 1.5 लाख डाकघर में से 93 % यानी 1.40 लाख ग्रामीण इलाकों में हैं.

इस योजना का इन किसानों को मिलेगा फायदा

बता दें कि अभी ये नियम है कि कहीं से फसली ऋण लेने वालों को अनिवार्य रूप से बीमा कराना पड़ता है. दरअसल आमतौर पर ऋण देने वाले बैंक या सहकारी बैंक ही उसका बीमा कर देते हैं, लेकिन जो किसान बैंक से लोन लिए बिना खेती करते हैं, उन्हें फसली बीमा पाने के लिए काफी झंझट का सामना करना पड़ता है.

बता दें कि कृषि मंत्रालय का कहना है कि अभी लोन नहीं लेने वाले किसानों में केवल 20 % ही बीमा करा पाते हैं. हमारा लक्ष्य इस संख्या को 50 % पहुंचाना है.

अलग-अलग फसलों का अलग प्रीमियम

आपको याद दिला दें कि 13 जनवरी 2016 को सरकार ने पीएमएफबीवाई लागू करते समय किसानों को मामूली प्रीमियम पर फसल बीमा देने का लक्ष्य रखा था. हालांकि, खरीफ और रबी की फसलों की प्रीमियम दर अलग रखी. दरअसल खरीफ की फसल के लिए किसानों को कुल प्रीमियम का 2% और रबी की फसल के लिए 1.5% देना होता है. शेष रकम का भुगतान सरकार करती है.

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