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NPA को लेकर RBI का बड़ा फैसला, अब बैंक का कर्ज चुकाने में हुई देरी तो लिया जाएगा ये एक्शन

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NPA को लेकर छिड़ी महाभारत के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने डूबे कर्ज़ यानी NPA को लेकर एक नया सर्कुलर जारी किया है. जी हनज़ दरअसल इसमें बैकों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी कर्जधारक के डिफॉल्ट करने के 30 दिन में उसके खाते की समीक्षा शुरू की जाए. बता दें कि इससे पहले एक दिन बाद ही उसके खाते की समीक्षा होने लगती थी.

अगर आसान शब्दों में समझाएं तो इसका मतलब यह है कि अगर कर्ज़ चुकाने में अब एक दिन की देरी हुई तो अब कर्ज़दार डिफॉल्टर घोषित नहीं होगा. नए नियमों के तहत इसकी सीमा एक दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दी गई है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये नया सर्कुलर तुरंत प्रभाव से लागू होगा. आरबीआई के 12 फरवरी 2018 के सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 2 अप्रैल को गैर-संवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था. आपको बता दें कि उर्जित पटेल-सरकार के बीच विवाद की वजह भी यहीं बना था.

मालूम हो कि एनपीए से जुड़ा आरबीआई का फरवरी 2018 वाला सर्कुलर आरबीआई के पिछले गवर्नर उर्जित पटेल और सरकार के बीच विवाद का मुद्दा था. याद हो कि उर्जित पटेल ने RBI गर्वनर पद से दिसंबर 2018 में इस्तीफा दे दिया था.

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NPA पर जारी हुआ नया सर्कुलर

बता दें कि नए सर्कुलर के अनुसार अब कुल लोन की 75% वैल्यू वाले कर्जदाताओं की मंजूरी जरूरी होगी.

दरअसल पहले सभी कर्जदाताओं की मंजूरी लेनी होती थी.

इसके अलावा अगर समीक्षा अवधि से 180 दिन में रेजोल्यूशन प्लान लागू नहीं होता है तो आरबीआई बैंकों से 20 % अतिरिक्त प्रोविजनिंग के लिए कहेगा.

यहां बता दें कि अगर 365 दिन में रेजोल्यूशन प्लान लागू नहीं होता है तो उस पर 35 % अतिरिक्त प्रोविजनिंग करनी होगी.

इससे पहले सर्कुलर में ये सब था

आपको बता दें कि आरबीआई के 12 फरवरी 2018 वाले सर्कुलर में यह प्रावधान था कि 2,000 करोड़ रुपए से अधिक के लोन में एक दिन का भी डिफॉल्ट होता है तो उस कर्ज को एनपीए घोषित कर उसके निपटारे की प्रक्रिया यानी कि रेजोल्यूशन शुरू कर दी जाए.

दरअसल ऐसी स्थिति में कर्ज का 180 दिन के भीतर निपटारा नहीं होने पर बैंकों को उसे दिवालिया प्रक्रिया में भेजना होता था.

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