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अब वैक्यूम क्लीनर से की जाएगी नदी-नालों की सफाई, उत्तराखंड सरकार ने लिया यह फैसला

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उत्तराखंड के देहरादून में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जी हां, दरअसल देहरादून में अब नदी, नालों की सफाई वैक्यूम क्लीनर से होगी। जी हां, दरअसल बुधवार यानी कि 5 जून को प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर बिन्दाल नदी में वृहद स्वच्छता अभियान कार्यक्रम शुरू करते हुए वैक्यूम क्लीनर जिसका नाम जटायु रखा गया है को आधिकारिक रूप से प्रारंभ कर दिया।

बता दें कि त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वर्षाकाल में परिवार के प्रत्येक सदस्य एक-एक वृक्ष का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें। उन्हाेंने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण व स्वच्छता को हमें अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा।

जनसहयोग है अति आवश्यक

आपको बता दें कि मीडिया की खबरों के मुताबिक त्रिवेन्द्र ने कहा कि रिस्पना, बिन्दाल, कोसी व अन्य नदियों के संरक्षण के लिए सरकार प्रयासरत है। रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के तहत इन नदियों पर कार्य किए जाएंगे। उनके अनुसार स्वच्छता अभियान व पर्यावरण संरक्षण के लिए जनसहयोग आवश्यक है। आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा, पानी व पर्यावरण देने के लिए हमें पर्यावरण व जल संरक्षण की दिशा में विशेष प्रयास करने होंगे।

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देश के 86 % जलाशयों में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक

जानकारी के लिए बता दें कि पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली स्वयं सेवी संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरनमेंट यानी कि सीएसई द्वारा मंगलवार को जारी ‘भारत की पर्यावरण रिपोर्ट, 2019’ के मुताबिक देश के जलाशयों में उपलब्ध पानी और भूजल दोनों में प्रदूषण बढ़ रहा है। कुल 86 जलाशयों में प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका एक कारण ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की संख्या में तेज वृद्धि है। वर्ष 2011 से 2018 के बीच इनकी संख्या 136 % बढ़ी है। भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है तो वहीं गहरे ट्यूबवेलों की संख्या 2006-07 से 2013-14 की तुलना में 80 % बढ़ी है। बता दें कि देश की 94.5 % लघु सिंचाई योजनाएं भूजल पर ही आश्रित हैं।

5 जून को मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस

आपको याद हो कि कल ही यानी 5 जून को इस साल का विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया और इस बार इसका थीम ‘वायु प्रदूषण को मात देना’ रखा गया है। बता दें कि रिपोर्ट में पर्यावरण से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है। जी हां, दरअसल सीएसई के अनुसार, वर्ष 2010 से 2014 के बीच ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 22 % की वृद्धि दर्ज की गई।

दरअसल इसकी सबसे ज्यादा जिम्मेदारी ऊर्जा क्षेत्र की है जो देश के कुल ग्रीन हाउस गैस का 73 % उत्सर्जित करता है। बता दें कि जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले साल 11 राज्यों में गंभीर मौसमी परिस्थितियों के कारण 1,425 लोगों की मौत हो गई।

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