Loading...

चीन की इस चाल से देश में बढ़ रही है बेरोजगारी, बांग्लादेश के रास्ते भारत में भेज रहा है कपड़ा

0 18

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कपड़ा सेक्टर एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण जा कि जब इस सेक्टर को चोट पहुंचती है तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर होता है। ऐसा ही कुछ इन दिनों भारत के साथ हो रहा है। जी हां, दरअसल देश में दूसरे सबसे बड़े रोजगार देने वाला कपड़ा सेक्टर मंदी का शिकार हो रहा है।

आपको बता दें कि श्रम व अन्य कानूनों में बदलाव के 3 साल बाद भारत का कपड़ा और परिधान निर्यात साल 2018 में गिरकर 37.12 अरब डॉलर रह गया। मालूम हो कि यह वर्ष 2014 में यह 38.60 अरब डॉलर था। इतना ही नहीं, इस दौरान आयात 5.85 अरब डॉलर से बढ़कर 7.31 अरब डॉलर हो गया है।

आपको बता दें कि इसकी प्रमुख वजह बांग्लादेश के जरिए चीन द्वारा भारत में कपड़ा भेजना और जीएसटी समेत अन्य कानून हैं। दरअसल इससे वस्त्र उद्योग को खासा नुकसान पहुंचा है और इस सेक्टर में बेरोजगारी भी बढ़ी है। यही वजह है कि करीब 1 करोड़ रुपए की नौकरी का लक्ष्य भी हासिल नहीं हो पाया है।

शुल्क में छूट के कारण चीनी कपड़ा बांग्लादेश के जरिए पहुंच रहा भारत में

Loading...

बता दें कि अंग्रेजी अखबार बिजनेस स्टेंडर्ड के मुताबिक कड़ी प्रतिस्पर्धा, निर्यात प्रोत्साहन का बंद होना और मंदी मुख्य कारण हैं जिनकी वजह से परिधान निर्यात में लगातार गिरावट आ रही है।

आपको बता दें कि बांग्लादेश से आयात पर मूल सीमा शुल्क की पूरी छूट है और यही प्रमुख कारण है कि चीन का कपड़ा आसानी से शुल्क मुक्त बांग्लादेश के जरिए भारत में आ रहा है। दरअसल जानकारों का कहना है कि इसकी वजह से लागत पर 6-7 % का असर पड़ा है जिससे कपड़ा निर्माताओं के मुनाफे में भारी कमी आई है।

वादे के मुताबिक नहीं हुआ 1 करोड़ नौकरियों का सृजन

जीएसटी व्यवस्था को उद्योग में सेट होने में लगे एक्स्ट्रा समय और छोटे एवं मध्य स्तर के उद्यमों द्वारा ऋण की कमी प्रमुख वजह रहीं जिससे उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। वैसे मंत्रालय और उद्योग निकायों के पास अपेक्षित आंकड़े नहीं हैं लेकिन फिर भी ऐसा माना जा रहा है कि कपड़ा क्षेत्र के लिए 6,000 करोड़ रुपये के कार्यक्रम शुरू किए जाने के बावजूद वादे के मुताबिक 1 करोड़ नौकरियों का सृजन नहीं हुआ है।

बीते साल के मुकाबले 4% दर्ज की गई गिरावट

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान वित्त वर्ष में अनुमानित 16.2 अरब डॉलर के हिसाब से भारत के परिधान निर्यात में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 1.2 % की गिरावट आई है जो पिछले वर्ष की तुलना में 4% कम रहा है।

दरअसल देश के कुल कपड़ा निर्यात में परिधान निर्यात की हिस्सेदारी भी वित्त वर्ष 2019 में 45 % रह गई जो वित्त वर्ष 2017 में 51 % थी।

बता दें कि उद्योग के विशेषज्ञ इस गिरावट के लिए बांग्लादेश और वियतनाम जैसे कम लागत वाले प्रतिस्पर्धियों की ओर से अधिक खेपों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। दरअसल उनका मानना है कि भारत के निर्यात बाजारों पर इसी कारण अनावश्यक दबाव बढ़ा है।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.