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नौकरी के बाद भी होती रहेगी मंथली इनकम, बस अपने फंड का इस तरह करें इस्तेमाल

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रिटायरमेंट के बाद हर महीने एक निश्चित कमाई होती रहे इसके लिए आपको सही जगह निवेश करने की आवश्यकता है। यही कारण है कि आज हम आपको एक उदाहरण के जरिए समझाने का प्रयास करेंगे।

उदाहरण के लिए मान लीजिए कि मयंक नामक व्यक्ति एक निजी कंपनी में काम करते हैं जो अगले 6 महीने में रिटायर हो जाएंगे. रिटायरमेंट के समय उन्हें करीब 30 लाख रुपये का फंड मिलेगा. नौकरी के दौरान मयंक ने घर, बच्चों की शिक्षा और गाड़ी जैसी जरूरतें तो पूरी कर ली, लेकिन रिटायरमेंट की प्लानिंग करने से चूक गए.

अब प्रश्न उठता है कि वह अपने फंड को कहां निवेश करें कि रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें महीने की कुछ न कुछ कमाई होती रहे. वह चाहते हैं कि कम से कम 25 हजार रुपये हर महीने मिले, जिससे वे अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें. इसके अलावा उन्होंने अपना एक फ्लैट किराए पर दिया है, जिससे हर महीने 15 हजार रुपये उन्हें मिल जाते हैं.

यहां है निवेश का विकल्प

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बता दें कि BPN फिनकैप के डायरेक्‍टर एके निगम के अनुसार इसके लिए बेहतर विकल्प है कि एक जगह निवेश की जगह फंड अलग अलग स्कीम में निवेश किए जाएं, जिससे रिस्क भी कवर होता रहे. उदाहरण के लिए अगर 30 लाख रुपये एक मुश्त मिले तो इसके लिए 10 लाख रुपये तो अपने इमरजेंसी फंड के रूप में बैंक में रख दें, जहां ब्याज जुड़ता रहेगा.

इसके बाद बचे हुए फंड को डाकघर की मंथली इनकम स्कीम और म्यूचुअल फंड में निवेश किया जा सकता है. मालूम हो कि म्यूचुअल फंड में इक्विटी और डेट फंड का रेश्यो 30:70 होना चाहिए. दरअसल दोनों से 8 से 9 % तक रिटर्न मिल सकता है. इसके अलावा सिस्टमेटिक विद्ड्रॉल प्लान और डिविडेंड भी बेहतर विकल्प है.

मंथली इनकम स्कीम

अगर सबसे प्रचलित स्कीम की बात करें तो मंथली इनकम स्कीम पोस्ट ऑफिस की पॉपुलर स्कीम है, जिसमें एक मुश्त निवेश कर हर महीने इनकम की जा सकती है. दरअसल इस स्कीम के तहत ज्वॉइंट अकाउंट के जरिए 9 लाख रुपये एक मुश्त निवेश किया जा सकता है.

मालूम हो कि इस पर सालाना ब्याज 7.3 % है. इस हिसाब से 9 लाख रुपये पर सालाना ब्याज 65700 रुपये होगा, जिसे 12 महीनों में बांट दिया जाएगा. यानी हर महीने करीब 5500 रुपये आप निकाल सकते हैं.

बता दें कि यह स्कीम 5 साल की है, लेकिन इसे आगे भी 5—5 साल के लिए बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा अगर किसी महीने पैसों की जरूरत नहीं है और ये पैसे नहीं निकालते हैं तो आपके कुल फंड में ये अमाउंट भी जुड़ जाएगा और इन पर भी ब्याज जोड़कर मिलेगा.

सिस्टमेटिक विद्ड्रॉल प्लान

जानकारी के लिए बता दें कि सिस्टमेटिक विद्ड्रॉल प्लान यानी कि SWP एक तरह से एग्रेसिव हाइब्रिड स्कीमों में डिविडेंड का विकल्प हैं. हालांकि पैसे के नियमित फ्लो के नजरिए से देखें तो यह बेहतर विकल्प है. बता दें कि इसमें आपको हर महीने जितने पैसे जरूरत होती है, उतना निकाल सकते हैं.

आपको बता दें कि SWP में निवेशक एक तय राशि म्यूचुअल फंड स्कीम में अपने निवेश से निकाल सकते हैं. दरअसल यह पैसा रोजाना, वीकली, मंथली, क्वार्टली, 6 महीेन पर या सालाना आधार पर निकाला जा सकता है.

मालूम हो कि अगर 10 लाख का कॉर्पस म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं और इस पर उसे औसतन 10 % की ब्याज मिलता है तो उसे हर महीने 8333 रुपए की आय होती रहेगी. वहीं, 20 लाख के कॉर्पस पर करीब 17 हजार रुपये महीने का मिल सकता है. खास बात यह है कि SWP पर निकासी पूरी तरह टैक्स फ्री होती है.

डिविडेंड ऑप्शन

बता दें कि इस उदाहरण में मान लीजिए कि अगर मयंक को मंथली इनकम की जरूरत है तो उन्हें डिविडेंड ऑप्शन के साथ एग्रेसिव हाइब्रिड फंडों में पैसा लगाना चाहिए. जी हां, दरअसल ये स्कीम 7 से 8 % तक रिटर्न दे सकती हैं.

हालांकि यहां एक बात बता दें कि यह डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स यानी कि डीडीटी पर निर्भर करेगा. बता दें कि 10 लाख के कॉर्पस पर हर महीने 6666 रुपये मिल सकते हैं. वहीं 20 लाख पर यह राशि करीब 13 हजार हो सकती है.

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