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दिल्ली मेट्रो के नाम दर्ज भी एक और उपलब्धि, पहली बार कूड़े से बनी बिजली से चली मेट्रो

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पर्यावरण स्वस्छ हो इज़के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसी संबंध में दिल्ली के पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने में सहयोग करने वाली डीएमआरसी कचरे से एनर्जी पैदाकर परिचालन करने वाला देश का पहला मेट्रो प्रोजेक्ट बन गया है। इसके साथ ही दिल्ली मेट्रो के इतिहास में एक और नया कीर्तिमान जुड़ गया है।

आपको बता दें कि दिल्ली मेट्रो पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सौर ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा दे रहा है। दिल्ली मेट्रो किसी वेस्ट टु एनर्जी यानी कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट से चलने वाली पहली मेट्रो बन गई है। इस बात की जानकारी डीएमआरसी ने दी।

जी हां, दरअसल डीएमआरसी ने एक बयान में कहा कि पर्यावरण हितैषी अपनी कई पहलों को जारी रखकर दिल्ली मेट्रो ने गाजीपुर में एक कंपनी से दो मेगावाट से लेकर 12 मेगावाट तक की बिजली लेना शुरू किया है।

मालूम हो कि डीएमआरसी के अनुसार, ‘कचरे से ऊर्जा पैदा करने वाले संयंत्र से बिजली खरीदने और इसका इस्तेमाल करने के लिये देश में किसी भी मेट्रो परियोजना द्वारा शुरू किया गया इस तरह का पहला प्रयास है। इसके जरिए स्वच्छ भारत मिशन में योगदान होगा और कचरा प्रबंधन के महत्व के बारे में जागरुकता फैलाने में भी मदद मिलेगी।’

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प्रतिदिन 1500 टन कचरे को प्रोसेस कर 12 मेगावाट बिजली पैदा कर सकता है ये प्लांट

आपको बता दें कि गाजीपुर में बनाया गया वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट पीपीपी मॉडल पर आधारित है, जिसमें दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम और ईडीडब्ल्यूपीसीएल की समान भागीदारी है। जी हां, इसके अलावा यह प्लांट प्रतिदिन 1500 टन कचरे को प्रोसेस करके 12 मेगावाट बिजली पैदा कर सकता है। मालूम हो कि यह संयंत्र भारत का पहला यूरो मानदंड आधारित प्लांट है, जो डब्ल्यूटीई सुविधा का अनुपालन करता है। बता दें कि इसके अलावा डीएमआरसी अपने रूफ टॉप सोलर प्लांट से 28 मेगावाट बिजली पैदा कर रहा है।

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