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150cc की बाइक्स और स्कूटर को लेकर केंद्र सरकार करने जा रही है बड़ा फैसला, आप पर होगा ये असर

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एक तरफ दिन प्रतिदिन बढ़ती पेट्रोल/डीज़ल की कीमतें और दूसरी तरफ तेज़ी से बढ़ता प्रदूषण, ये दो ऐसे प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह से इलेक्ट्रिक वाहन बाजार का काफी सुनहरा भविष्य खासतौर पर भारत में दिखलाई दे रहा है।

यही कारण है कि अब इंडियन मार्केट में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में अगर सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की सिफारिश को मान लिया गया तो देश में एक अप्रैल 2023 से सिर्फ इलेक्ट्रिक तिपहिया ही बिकेंगे। और इसी प्रकार एक अप्रैल 2025 से सिर्फ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन ही बिकेंगे। हालांकि दोपहिया वाहनों में 150 सीसी से ऊपर यानी बड़ी क्षमता की बाइकें पहले की तरह बनती और बिकती रहेंगी।

31 मार्च 2023 तक होगी बिक्री

आपको बता दें कि नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत की अध्यक्षता वाली स्टीयरिंग कमेटी ऑन ट्रांसफोर्मेटिव मोबिलिटी ने इस तरह की सिफारिश की है। जी हां, दरअसल इसके मुताबिक पेट्रोल-डीजल या सीएनजी से चलने वाले दुपहिया वाहनों की बिक्री सिर्फ 31 मार्च 2023 तक ही हो पाएगी।दरअसल इसके बाद सभी तरह के तिपहिया वाहन इलेक्ट्रिक से चलने वाले हो जाएंगे।

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इसी प्रकार पेट्रोल या किसी अन्य ईंधन से चलने वाले 150 सीसी क्षमता तक के दोपहिया वाहनों की बिक्री भी 31 मार्च 2025 तक ही हो पाएगी। इस तिथि के बाद बाजार में सिर्फ ई व्हीकल ही बिकेंगे ओर बनेंगे।

भारत को ई व्हीकल मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाना है लक्ष्य

दरअसल अमिताभ कांत के मुताबिक भारत को वह ई व्हीकल मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि ई व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए जो सब्सिडी की योजना फेम-2 तैयार की गई है, उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि सब्सिडी उसी वाहन को मिलेगा जो भारत में बने होंगे। साथ ही उनका यह भी कहना है कि हर ई वाहन में 50 % से ज्यादा सामान भारत में ही बनाने की तैयारी किये बिना इस क्षेत्र में मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा नहीं मिल सकता है।

दुनिया भर में बढ़ रही है ई व्हीकल की हिस्सेदारी

अमिताभ कांत का कहना है कि दुनिया भर में ई व्हीकल की हिस्सेदारी बढ़ रही है और भारत में भी इसे बढ़ाया जाएगा इसीलिए सरकार चाहती है कि इसे निजी के बदले शेयरिंग मोबिलिटी से जोड़ा जाए। दरअसल उनका कहना है कि आज सड़कों पर जितना अधिक शेयरिंग मोबिलिटी के वाहन बढ़ेंगे, उतना ही प्रदूषण घटेगा। उन्होंने कहा कि शेयरिंग मोबिलिटी की स्वीकार्यता धीरे धीरे बढ़ रही है और इसे और बढ़ाने का प्रयास चल रहा है।

फेम-2 के लिए नहीं होगी पैसे की कमी

मालूम हो कि नीति आयोग का कहना है कि फेम-2 योजना के लिए पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी। बता दें कि फिलहाल इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। अगर जरूरत पड़ी तो इसमें और आवंटन बढ़ाया जाएगा। साथ ही इस योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

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