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पब्लिक सेक्टर बैंकों की हालत सुधारने के लिए मोदी सरकार देगी 40 हजार करोड़ रुपए, ये है वजह

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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक यानी पब्लिक सेक्टर के बैंकों की आज के समय क्या हालत है ये तो किसी से छुपी नहीं है। दरअसल पिछले कुछ समय में सामने आए बैंकिंग घोटाले एवं बढ़ते एनपीए के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है।

ऐसे में बैंकों के इन हालातों को सुधारने और प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन यानी कि PCA फ्रेमवर्क से बाहर निकालने के लिए सरकार उन्हें इस वित्त वर्ष में 40 हजार करोड़ रुपए दे सकती है। जी हां, दरअसल इसका आधिकारिक ऐलान आगामी 5 जुलाई को पेश किए जाने वाले बजट में हो सकता है।

रकम देने के पीछे ये है कारण

आपको बता दें कि एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार फिलहाल लोन ग्रोथ बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि कई कमजोर बैंकों की बैलेंस सीट आड़े आ रही है। दरअसल चिंता का विषय यह है कि बैलेंस शीट कमजोर होने का कारण इन बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक के पीएसए फ्रेमवर्क में आ जाते हैं जिससे उनके लोन देने पर पाबंदी लग जाती है।

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यही कारण है कि इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार ने इन बैंकों को 40 हजार करोड़ रुपए देने का फैसला किया है। मालूम हो कि इससे बैंकों की बैलेंस शीट में सुधार होगा, इसके साथ ही वह पीसीएम फ्रेमवर्क से बाहर निकलकर लोन देने के काबिल हो जाएंगे।

पिछले साल बैंकों को दिए गए थे 1.6 लाख करोड़ रुपए

यहां आपको याद दिला दें कि पिछले साल सरकार ने पब्लिक सेक्टर के कई बैंकों को पीसीए फ्रेमवर्क से बाहर निकालने के लिए रिकॉर्ड 1.6 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया था। दरअसल इस सरकारी मदद से 5 बैंक पीसीए फ्रेमवर्क से बाहर आ गए थे। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो वर्तमान वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे आने के बाद ही बैंकों को पूंजी देने पर किसी प्रकार का कोई फैसला होगा।

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