प्रेरक कथा: एक बुढ़िया भगवान को अपना सबकुछ चढ़ा देती है, यहां तक कि अपने घर का कचरा भी, एक फकीर उससे बोला कि आप यह क्या कर रही हो, भला भगवान को कचरा कौन चढ़ाता है?

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किसी गांव में एक बुढ़िया रहा करती थी, जो अपनी सारी चीजें भगवान को चढ़ा देती थी। यहां तक कि वह अपने घर से निकलने वाला कचरा भी भगवान के मंदिर में जा कर फेंक आती थी और कहती थी कि तेरा तुझको ही समर्पित। जब गांव के लोगों को यह बात पता चली तो लोगों ने कहा कि भगवान को फूल, मिठाई तो सब चढ़ाते हैं कचरा कौन चढ़ाता है?

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एक बार एक फकीर उस गांव से गुजरे और उन्होंने देखा कि बुढ़िया मंदिर की ओर गई और भगवान की ओर कचरा फेंककर कहा- हे भगवान, तेरा तुझको ही समर्पित। फकीर ने उससे कहा- बाई, मैंने बड़े-बड़े संत देखे हैं। तुम यह क्या कर रही हो, भगवान तो कचरा कौन चढ़ाता है। बुढ़िया ने भगवान की ओर इशारा करते हुए कहा- मुझसे नहीं इनसे पूछो।

जब मैं अपना सब कुछ दे देती हूं तो अपना कचरा क्यों बचाऊं। फिर उसी रात फकीर ने स्वप्न देखा कि वह स्वर्ग में हैं और परमात्मा के सामने खड़ा हुआ है। परमात्मा सोने के आसन पर बैठे हुए हैं। पक्षी गीत गा रहे हैं और तभी अचानक से एक टोकरी कचरा भगवान के पास आता है।

फकीर न से पूछा कि हे प्रभु, मैं इस बाई को जानता हूं। यह हर रोज आपको कचरा चढ़ाती है, मैंने इसे कल भी देखा था और उससे पूछा भी था। फकीर लगभग 1 घंटे तक पर फकीर स्वर्ग में रहा। वह कई ऐसे लोगों को भी जानता था, जो भगवान को फूल, मिठाई चढ़ाते हैं। लेकिन उनकी कोई भी चीज भगवान के पास नहीं आई।

फकीर ने भगवान से पूछा कि प्रभु आपको बहुत से लोग फूल और मिठाई चढ़ाते हैं। लेकिन यहां तो कोई फूल और मिठाई नहीं है। भगवान ने फकीर से कहा- जो लोग मुझे आधा चढ़ाते हैं, उनकी कोई भी चीज मेरे पास तक नहीं आती। इस महिला ने मुझे अपना सब कुछ समर्पित किया है। यह अपनी सारी चीजें मुझे चढ़ा देती है। जो मुझे अपना सब कुछ समर्पित करता है, उसका चढ़ावा ही मेरे पास आता है।

कथा की सीख

यह कहानी आचार्य रजनीश ओशो ने अपने प्रवचन के दौरान बताई थी कि हमें भगवान की भक्ति पूरे मन से करनी चाहिए। जो लोग भगवान को अपना सब कुछ समर्पित कर देते हैं, भगवान उन्हीं की भक्ति से प्रसन्न होते हैं।

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