देश के सैकड़ों एटीएम पर मंडरा रहा है बंद होने का खतरा, ये है इसके पीछे का कारण

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अगर आपके घर के पास कोई एटीएम है तो कोई भरोसा नहीं कि वो एटीएम बंद हो जाए।जी हां, दरअसल इंडस्ट्री की लागत बढ़ने से सैकड़ों एटीएम पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। मालूम हो कि एटीएम इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों के मुताबिक सरकार ने हाल ही में एटीएम से जुड़े नियम को सख्त कर दिया है, जिससे एटीएम के रखरखाव की लागत में पिछले एक साल में 40 % तक का इजाफा हुआ है। लेकिन उसके मुकाबले उनकी आमदनी में बढ़ोतरी नहीं हुई है। यही कारण है कि अब कई एटीएम संचालक अपने-अपने एटीएम को बंद करने की तैयारी कर रहे हैं।

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एटीएम मेंटेनेंस की लागत में आया है इजाफा

मालूम हो कि कंफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री के महानिदेशक ललित सिन्हा ने बताया कि देश में अभी लगभग 2.20 लाख एटीएम है। इनमें से 18 हजार व्हाइट लेवल एटीएम है जिसे पूर्ण रूप से निजी कारोबारी चलाते हैं। वहीं 50,000 एटीएम ब्राउन लेवल एटीएम कहलाते हैं जिसमें बैंक की तरफ से ट्रांजेक्शन का काम किया जाता है, अन्य काम की जिम्मेदारी निजी संचालकों की होती है। बाकी के एटीएम बैंक द्वारा संचालित है।

दरअसल सिन्हा ने बताया कि कुछ महीने पहले एटीएम के रखरखाव एवं एटीएम में ट्रांजेक्शन के नियमों को आरबीआई एवं गृह मंत्रालय ने सख्त कर दिया था। इससे एटीएम के रखरखाव की लागत में पिछले साल के मुकाबले 40 % तक का इजाफा हो गया है। ऐसे में, यह कारोबार अब व्यावहारिक नहीं रह गया है।

पहले से ही कम एटीएम हैं भारत में

जानकारी के लिए बता दें कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ताजे आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि पिछले 2 साल में देश में एटीएम की संख्या तेजी से गिरी है।

मालूम हो कि International Monetary Fund के मुताबिक BRICS देशों में भारत के पास प्रति लाख आबादी पर सबसे कम एटीएम हैं। जी हां, दरअसल रूस में प्रति लाख आबादी पर 164, ब्राजील में 107, चीन में 81, साउथ अफ्रीका में 68 और भारत में सिर्फ 22 एटीएम हैं। अब जाहिर है कि एटीएम के बंद होने से प्रति लाख आबादी पर एटीएम की संख्या और भी कम हो जाएगी।

बैंक ब्रांचेज का घटना है बड़ी वजह

आपको बता दें कि एटीएम की घटती संख्या के पीछे बड़ी वजह है सरकारी बैंकों द्वारा ब्रांचों को कम करना। जी हां, दरअसल साल 2018 के शुरुआती 6 महीनों में 5 असोसिएट बैंकों और एक लोकल बैंक को खरीदने के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी 1000 ब्रांच बंद कर दीं हैं।

डिजिटाइजेशन को मिलेगा बढ़ावा

दरअसल एटीएम की संख्या घटने से मोबाइल बैंकिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एक आंकड़े के अनुसार पिछले 5 सालों में ही मोबाइल बैंकिंग ट्रांजैक्शन 65 % बढ़ा है। दरअसल इसका प्रमुख कारण यह है कि देश की युवा आबादी ऑनलाइन बैंकिंग और मोबाइल ऐप की तरफ शिफ्ट हो रही है।

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