ऑटो चालक ने पेश की इंसानियत की मिसाल, सड़क किनारे दर्द से तड़प रही गर्भवती महिला की ऐसे की मदद

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आज का दौर ऐसा है जब किसी के पास किसी के लिए वक़्त नहीं है, अपनो के लिए भी लोगो के पास समय नहीं है। ऐसे में किसी गैर की मदद करना तो एक सपना जैसा ही लगता है, लेकिन बेंगलुरु के ऑटो ड्राइवर बाबू मुद्दरप्पा ने जो काम किया उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया।

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दरअसल बाबू ने जो काम किया वो इंसानियत की मिसाल पेश कर रही है। बता दें लोग उनकी जमकर तारीफ भी कर रहे हैं। चलिए आपको भी बताते हैं कि आखिर पूरा मामला है क्या।

दरअसल, बाबू युद्दरप्पा बेंगुलुरू में ऑटो चलाते हैं। हर रोज की ही तरह वो सड़क पर सवारियों को देख रहे थे, लेकिन उन्हें कोई सवारी नहीं मिली। वहीं उन्होंने देखा कि सड़क के किनारे पर एक महिला है जो कि दर्द से कराह रही थी। इस महिला के आसपास और भी महिलाएं थी, लेकिन मदद कोई नहीं कर रहा था।

बाबू ने जब ये देखा तो वो भागकर वहां गए। उन्होंने देखा कि महिला चलने की हालत में नहीं है। वहीं जब उन्होंने अन्य महिला से पूछा तो उन्हें पता चला की वो महिला प्रेगनेंट हैं और उसे लेबर पेन हो रहा था। ऐसे में बाबू ने बिल्कुल भी देर नहीं की और महिला को अपने ऑटो में बैठाकर वैदेही अस्पताल ले गए।

हालांकि इस अस्पताल में सुविधाओं की कमी के चलते डॉक्टरों ने महिला को सीवी रमन अस्पताल में रेफर कर दिया। बाबू के मुताबिक जब उन्होंने महिला से उनके परिवार के बारे में पूछा तो उन्होंने कुछ नहीं बताया। लग रहा था कि वो महिला अपने परिवार वालों को इसके बारे में कुछ नहीं बताना चाहती थी।

वहीं दूसरी तरफ बाबू के पास जितने भी पैसे थे उन्होंने वो सब सीवी रमन अस्पताल में फीस के रूप में जमा करवा दिए थे। बता दें कि यहां महिला ने एक प्यारी सी बच्ची को जन्म दिया। वहीं इस दौरान बाबू अस्पताल में अपना नाम और नंबर लिखवाकर घर आ गए थे। थोड़ी देर बाद उन्हें अस्पताल से कॉल आया कि बच्ची की हालत काफी अच्छी नहीं है और उसे बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल में शिफ्ट करना होगा।

इस बीच बच्ची की मां अस्पताल से फरार हो गई थी। बावजूद इसके बाबू पीछे नहीं हटे। उन्होंने बच्ची को कपड़े में लपेटा और अपने ऑटो से बच्ची को लेकर बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल लेकर पहुंच गए। वहीं इसके बाद एक हफ्ते तक बाबू ने बच्ची की अस्पताल में देखभाल की।

वहीं दूसरी तरफ पुलिस बच्ची की मां को ढूंढने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वो नहीं मिली। हालांकि इसी बीच 4 मई के दिन अस्पताल से फोन आया कि बच्ची अब इस दुनिया में नहीं रही। दरअसल बाबू ने इसके बाद तय किया कि वो बच्ची की लाश को खुद दफनाएंगे और उन्होंने कुछ पुलिस वालों के साथ मिलकर ऐसा ही किया। अब जहां इस मामले ने बाबू जैसे लोग भी इस दुनिया में होते हैं ये बताया, तो वहीं कैसे लोग अपने बच्चों को छोड़कर भाग जाते हैं। इस बात को भी उजागर किया।

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