भारत से दुश्मनी करना पाकिस्तान को पड़ा महंगा, गंवानी पड़ गई 70,81,50,00,000 रुपए की मदद

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पाकिस्तान कि हालात खराब है। आज के समय पाकिस्तान पैसे-पैसे को मोहताज है लेकिन बावजूद इसके वो भारत के साथ दुश्मनी निभाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता है। जी हां, दरअसल पाकिस्तान के अखबार डॉन ने लिखा है कि पाकिस्तान अगर अफगानिस्तान को बाघा-अटारी बॉर्डर के जरिए भारत से व्यापार की सहमति दे देता तो वर्ल्ड बैंक पाकिस्तान को 500 मिलियन डॉलर की मदद देने को तैयार था।

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दरअसल, वर्ल्ड बैंक ने पाकिस्तान को सीपेक की तर्ज के पेक खायबर पास इकोनॉमिक्स कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव दिया था और कहा था कि इससे रीजनल कनैक्टिविटी बढेगी और विकास होगा। लेकिन अफगानिस्तान ने कहा कि जब पाकिस्तान भारत के रास्ते व्यापार की सहमति दे तो वो प्रोजेक्ट में शामिल हो जायेगा। बता दें कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की यह छोटी सी बात नहीं मानी और उसके हाथ से 500 मिलियन डॉलर यानि कि लगभग 71 अरब रुपये फिसल गये।

दरअसल वर्ल्डबैंक चाहता था कि सेंट्रल एशिया रीजनल इकोनॉमिक कॉर्पोरेशन के तले इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जाये। बता दें कि पाकिस्तानी अखबार डॉन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ल्ड बैंक यह भी चाहता था कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ताजिखिस्तान ट्रेड एग्रीमेंट में ही केपेक को शामिल कर जाये।

आपको बता दें कि ‘डॉन’ ने लिखा है कि अफगानिस्तान के अफसरों ने रीजनल कनैक्टिविटी के मुद्दे पर जोर दिया और कहा कि अगर पाकिस्तान बाघा-अटारी बॉर्डर से अफगानिस्तान को भारत से व्यापार की सहमति दे देता है तो वो पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ताजिखिस्तान ट्रेड एग्रीमेंट और केपेक दोनों में अपनी सहभागिता को तत्पर है।

मालूम हो कि अफगानिस्तान ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर पाकिस्तान उसे भारत के साथ सड़क मार्ग से व्यापार की सहमति नहीं देता है तो रीजनल कनैक्टिविटी के कोई मायने नहीं होगा। वहीं अंतर्राष्ट्रीय विदेश नीति के एक्सपर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान लैण्ड लॉक कंट्री अफगानिस्तान पर प्रत्यक्ष रूप से अपना प्रभाव देखना चाहता है।

इसके अलावा कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि पाकिस्तान तो बलोचिस्तान की तरह अफगानिस्तान को खुद में मिला लेना चाहता था लेकिन ऐसा हो न सका। इसके अलावा तालिबान को पैसा-हथियार और संरक्षण देकर पाकिस्तान अफगानिस्तान में लगातार युद्ध कर रहा है। इन परिस्थितियों के बीच भारत का अफगानिस्तान को सहयोग और संरक्षण पाकिस्तान को अखरता है।

जी हां, यही कारण है कि पाकिस्तान बाघा-अटारी बॉर्डर के जरिए व्यापार की सहमति नहीं दे रहा है।

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