सुकरात के एक शिष्य ने उनसे पूछा- सुंदर लोग आईने में अपना चेहरा क्यों देखते हैं? सुकरात ने कहा- खूबसूरत लोगों को रोज आईना जरूर देखना चाहिए, इसके बाद उन्होंने इसका कारण भी बताया

0 18

यूनान के महान दार्शनिक सुकरात दिखने में सुंदर नहीं थे। एक दिन जब वे आईने में अपना चेहरा देख रहे थे, तभी उनके कमरे में उनके शिष्य आए और सुकरात को शीशे में चेहरा देखते हुए मुस्कुराने लगे तो फिर सुकरात समझ गए कि उनके शिष्य के मस्तिष्क में क्या चल रहा है।

सुकरात ने अपने शिष्य से कहा- मैं समझ गया हूं कि तुम क्यों मुस्कुरा रहे हो। तुम अवश्य सोच रहे हो कि मुझ जैसा कुरूप व्यक्ति आईने में अपना चेहरा देख रहा है? शिष्य इस बात पर लज्जित हुआ और उसने सुकरात से क्षमा मांगीह। सुकरात ने उससे सवाल पूछा- तुम जानना चाहते हो कि मैं आईना क्यों देखता हूं? मैं रोज आईने में अपने कुरूपता के दर्शन करता हूं और सोचता हूं कि जीवन में हमेशा अच्छा काम करूं, ताकि मेरे अच्छे काम मेरी कुरूपता को ढ़क दें।

शिष्य सुकरात के विचार के बारे में जानकार बहुत प्रभावित हुआ। लेकिन उनके मन में एक सवाल आया। उसने पूछा तो गुरुजी सुंदर लोग आईना क्यों देखते हैं। उन्हें इसकी जरूरत नहीं होनी चाहिए। सुकरात ने जवाब दिया, ऐसा नहीं है। सुंदर लोगों को आइना देखना चाहिए और अपना सुंदर मुख देखकर यह सोचना चाहिए कि जितने वे सुंदर है, उतने ही सुंदर और भले कर्म करें, ताकि बुरे कर्म उनकी सुंदरता को ना ढ़क सके और वे अपने कामों की वजह से सुंदर कहलाएं।

लाइफ मैनेजमेंट

हम कैसे दिखते हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हम क्या काम करते हैं। अगर हम अच्छा काम करेंगे तो कुरूप होने पर भी लोग हमसे प्यार करेंगे। लेकिन चेहरा कितना भी सुंदर हो, अगर हम बुरे काम करेंगे तो तो सब हमसे नफरत करेंगे।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.