बेटे ने माता-पिता से गुस्सा होकर घर छोड़ दिया, कुछ दिनों तक ऐसे ही भटकता रहा, एक रात वह बीमार हो गया तो उसे याद आया कि माता-पिता बीमारी में कैसे उसकी सेवा करते थे

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एक परिवार में माता-पिता और एक बेटा रहता था। लेकिन एक दिन माता-पिता से गुस्सा होकर बेटा घर छोड़कर चला गया। माता-पिता ने उसे बहुत ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला। बेटा पास के ही नगर में गया था और कुछ दिनों तक भटकता रहा, उसे बड़ी मुश्किल से रहने के लिए एक झोपड़ी मिली। वह दिनभर थोड़ा बहुत काम करता, जिससे उसे खाना मिल जाता।

एक रात बेटे की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई। वह झोपड़ी में अकेला था। फिर उसे याद आया कि जब वह बीमार होता था तो उसके माता-पिता कैसे उसकी सेवा करते थे। उनकी देखभाल की बदौलत ही वह जल्दी ठीक हो जाता था। उसके माता-पिता उसे कितना प्रेम करते हैं और उसके सुख के लिए कितनी मेहनत करते हैं। आज बिना माता-पिता के वह कैसे तड़प रहा है।

इसके बाद वह उठा और अपने घर की ओर चल दिया। उसका घर ज्यादा दूर नहीं था। इस वजह से वह रात में ही अपने घर पहुंचा और उसने देखा कि उसका घर का दरवाजा खुला हुआ है। लड़के ने सोचा कि इतनी रात में दरवाजा खुला है, कहीं कुछ अनहोनी तो नहीं हो गई। इसलिए वह दौड़ता हुआ घर भी गया।

माता-पिता लेटे हुए थे और जैसे ही उन्होंने अपने बेटे को देखा उसे गले से लगा लिया। बेटे ने पूछा कि इतनी रात में दरवाजा खोल कर रखा है। पिता ने बताया कि बेटा जब से तू गया है, हमने उसी दिन से यह दरवाजा खुला छोड़ दिया है। हम सोच रहे थे कि तू कब आ जाए और ऐसा ना हो कि दरवाजा बंद देखकर तू फिर से चला जाए। इसलिए हमने यह दरवाजा बंद नहीं किया। बेटे को अपनी गलती पर बहुत पछतावा हुआ।

कथा की सीख

कथा से हमें यह सीख मिलती है कि माता-पिता अपने बच्चों से प्रेम करते हैं। लेकिन बच्चे यह बात समझ नहीं पाते कि माता-पिता उनके सुख के लिए कितने कष्ट झेलते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं। ताकि वे अपनी संतान को सारे सुख दे सकें। इसीलिए बच्चों को माता-पिता की इज्जत करनी चाहिए।

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