10 लाख रुपए में बिकी PM मोदी को तोहफे में मिली शिव की मूर्ति, जानें बाकी तोहफों के बारे में

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पिछले पांच वर्षों के दौरान कई तोहफे मिले हैं। जी हां, जहां पर भी मोदी गए हैं वहां उनको अलग अलग किस्म के ढेरों तोहफे मिले हैं। अक्सर बीच बीच में ऐसे तोहफों की नीलामी होती रहती है। हाल ही में प्रधानमंत्री को मिले तोहफों की निलामी 31 जनवरी तक चली।

अब इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने सूची जारी की है कि इन तोहफों की कितनी कीमत लगी है। बता दें कि इसमें सबसे ज्यादा महंगी बिकी अशोक स्तंभ की प्रतिकृति जिसे 13 लाख रुपए में खरीदा गया। मालूम हो कि इसका बेस प्राइज 4000 रुपए था।

वहीं भगवान शिव की एक मूर्ति को अपने 5,000 रुपए के बेस प्राइज से 200 गुना ज्यादा यानि 10 लाख रुपए में खरीदा गया।

कुछ और तोहफों की लगी इतनी बोली

अन्य तोहफों में असम के मजुली से मिला वहां का पारंपरिक चिह्न ‘होराई’ को 12 लाख रुपए में खरीदा गया। इसका बेस प्राइज 2,000 रुपए था।

वहीं अमृतसर के SGPC से मिला समृति चिह्न ‘Divinity’ को 10.1 लाख रुपए में खरीदा गया। इसका बेस प्राइज 10,000 रुपए था।

गौतम बुद्ध की एक मूर्ति 7 लाख रुपए में खरीदी गई। इसका बेस प्राइज 4 हजार रुपए था।

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री सुशील कोईराला से मिला शेर का स्टैच्यू 5.20 लाख में बिका।

खूबसूरत नक्काशी वाला चांदी का एक कलश 6 लाख रुपए का बिका।

इनके अलावा छत्रपति शिवाजी की प्लास्टर ऑफ पेरिस की बनी आवक्ष प्रतिमा 22 हजार रुपए में बिकी जबकि इसकी आरक्षित कीमत केवल 1 हजार रुपए थी।

1800 चीजों की हुई नीलामी

बता दें कि यह खास नीलामी दो चरणों में हुई। इसमें कुल 1800 वस्तुओं की बोली लगाई गई। पहले चरण में राष्ट्रीय अाधुनिक कला संग्रहालय में दो दिन तक 270 उपहारों और वस्तुओं की नीलामी हुई। तब स्वर्ण मंदिर का एक स्मृति चिह्न 3.5 लाख रुपए में बिकी, जिसका आरक्षित मूल्य 10 हजार रुपए तय किया गया था।

इनके अलावा एक लकड़ी की बाइक और पेटिंग 5-5 लाख रुपए में बिकी। इन दोनों की शुरूआती कीमत 45,000 और 50,000 थी। इसके अलावा बाकी उपहारों की ई-नीलामीwww.pmmementos.gov.in पर 31 जनवरी तक चली। बता दें कि इस नीलामी से मिली राशि नमामि गंगे परियोजना में दी जाएगी।

नमामि गंगे परियोजना में दी जाएगी यह राशि

इस नीलामी से मिली कुल राशि का को ‘नमामि गंगे परियोजना’ में खर्च किया जाएगा। मालूम हो कि प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब भी उन्होंने खुद को मिले उपहारों की नीलामी कराई थी। बता दें उस वक़्त उन्होंने उससे मिली धनराशि को बालिकाओं की शिक्षा पर खर्च किया गया था।

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