कार-बसों के लिए अब आने वाला है नया ईंधन, कम होगा प्रदूषण, इस राज्य से होगी इसकी शुरुआत

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प्रदूषण आज के दौर में एक जटिल समस्या बन चुका है, खासतौर पे भारत में तो प्रदूषण एक बेहद ही खतरनाक रूप ले चुका है। ऐसे में प्रदूषण से निपटने के कई कदम उठाए जा रहे हैं, हालांकि अभी इस समस्या को पूरी तरह से दूर करने में समय तो काफी लगेगा। वैसे इस समस्या का एक हल इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन भी लेकर आई है।

जी हां, देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने सीएनजी में हाइड्रोजन मिलाकर एचसीएनजी तैयार किया है जो वर्तमान इंजनों पर भी बीएस-6 उत्सर्जन के लगभग सभी मानकों को पूरा करेगा। इस बात की जानकारी आईओसीएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजीव सिंह ने दी।

बता दें कि यह नाइट्रोजन ऑक्साइड को छोड़कर अन्य सभी प्रदूषकों के मामले में भारत में स्टेज-6 पर खरा उतरता है। दरअसल देश में बीएस-6 अगले साल 01 अप्रैल से लागू होना है। संजीव सिंह के मुताबिक एचसीएनजी तैयार करने की आईओसीएल की प्रौद्योगिकी का पेटेंट हो चुका है। जल्द ही दिल्ली में एक डीटीसी बस डिपो से इसकी शुरुआत होगी।

नई टेक्नोलॉजी आ सकती है भविष्य में

दरअसल संजीव सिंह ने कहा कि इस समय उर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव हो रहे हैं। शेल गैस की टेक्नोलॉजी ने पिछले चार-छह साल में पूरे माहौल को बदल दिया है।

संजीव के मुताबिक आने वाले समय में कोई और टेक्नोलॉजी सामने आने के आसार प्रबल हैं। उन्होंने कहा जैसे आज के समय में यूरो-6 मानक वाले पारंपरिक वाहन इंजन सीएनजी इंजनों के समान ही कम प्रदूषण करने वाले हैं। इसी प्रकार हो सकता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार में छाने से पहले ही उनसे ज्यादा दक्ष पारंपरिक इंजन बाजार में आ जाएं।

नवीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ोतरी होने की है संभावना

ओएनजीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शशि शंकर के अनुसार वर्ष 2040 तक उर्जा खपत में तेल की हिस्सेदारी कम होगी हालांकि गैस की खपत जरूर बढ़ेगी।

उनके मुताबिक नवीकरणीय उर्जा के क्षेत्र में तेजी से वृद्धि होगी। दरअसल एक अनुमान के अनुसार देश में 2016 से 2040 के बीच हाइड्रोकार्बन की मांग 2.5 %, तेल की 3.5 %, कोयले की 3.6 %, गैस की 4.5 %, नाभिकीय उर्जा की सात प्रतिशत और नवीकरणीय उर्जा की 12 % की दर से बढ़ेगी।

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