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6 साल की बच्ची को घोड़े सुस्त करने वाला इंजेक्शन देकर 8 घंटे में किया था 3 बार रेप, होश आया तो कर दी हत्या

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राजस्थान के यमुनानगर में एक पूर्व मंत्री के फार्म हॉउस पर 6 वर्षीय बच्ची के बलात्कार में दोषी को उसकी आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई गई है।

जी हां, दरअसल कोर्ट ने मात्र 6 माह और 27 दिन में तीन सुनवाई में ही फैसला सुना दिया। न्यायाधीश अब्दुल माजिद ने कहा कि बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं ऐसे में अलग तरह की सजा देना जरूरी है। आरोपी के तीन बच्चे हैं और ऐसे में यदि आरोपी को समाज से मिटा दिया गया तो बच्चों पर बुरा असर पड़ेगा। इसलिए फांसी के बजाय आजीवन जेल में रहने की सजा सुनाई है। दोषी पर ढाई लाख रुपए जुर्माना लगाया है। इस जुर्माने की 90 % राशि बच्ची के परिजनों को दी जाएगी।

डीएनए रिपोर्ट बनी सजा का आधार

दरअसल बच्ची के प्राइवेट पार्ट में मिले स्पर्म व दोषी का डीएनए मैच हुआ था। गवाह बने 22 लोग बयान पर कायम रहे। और यही सजा का आधार बना। हालांकि कोर्ट ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए।

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कोर्ट के मुताबिक पुलिस ने फार्म मालिक से पूछताछ तक नहीं की। इसके अलावा डीएनए के सैंपल भी समय पर लैब में नहीं भेजे। वहां से रिपोर्ट देरी से आई। पुलिस की जांच सही होती तो केस कुछ और होता।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में था केस लेकिन जज के अवकाश पर जाने से एडीजे की कोर्ट में आया

बता दें कि पहले यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में था। चूंकि जज छुट्टी पर चले गए इसलिए ये केस एडीजे की कोर्ट में ट्रांसफर हुआ। 24 जनवरी को पहली सुनवाई हुई। 25 को दोषी ठहराया गया और 28 को सजा सुना दी।

दरिंदगी के बाद चाकू से रेता था गला

आरोपी देवी सिंह ने कबूला था कि 2 जून 2018 को बच्ची यमुना नदी पर मछली पकड़ने गए पिता के पास जाने को रो रही थी। तभी वह उसे उठाकर ले गया। उसे घोड़े सुस्त करने वाला इंजेक्शन लगाया। 3 बार रेप किया। होश आने लगा तो चाकू से गला रेत दिया।

फांसी के लिए जाएंगे हाईकोर्ट

सरकारी वकील सुरजीत आर्य ने कहा कि 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के दोषी को कानून में फांसी की सजा का प्रावधान है। हमने कोर्ट से फांसी की सजा की मांग की थी लेकिन मिली नहीं। अब हम सरकार से अनुमति के बाद हाईकोर्ट जाएंगे।

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