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असंगठित क्षेत्र के कामगारों को मोदी सरकार का तोहफा, अब हर महीने मिलेगी इतनी रकम

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लोकसभा चुनाव से पहले आर्थिक रूप से पिछड़े जनरल केटेगरी के लोगों को यानी की सवर्णों को 10 % आरक्षण का ऐतिहासिक एलान करने और सूखा ग्रस्त इलाकों के किसानों को चार राज्यों में 6680 करोड़ रुपए का राहत पैकेज देने के पश्चात अब मोदी सरकार की प्लेनिंग असंगठित क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने की है।

यही कारण है कि इसके लिए मोदी सरकार फाइनेंशियल सिक्यॉरिटी स्कीम शुरू करने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि ऐसे क्षेत्रों में काम करने वाले 10 करोड़ लोगों को रिटायरमेंट के बाद सरकार पेंशन गारंटी देने की योजना पर विचार कर रही है। बता दें कि इस दायरे में वही लोग आएंगे जिनकी सैलरी 15 हजार रुपये से कम है।

मालूम हो कि इस योजना में घरेलू नौकर, ड्राइवर, प्लबंर, बिजली का काम करने वालों, नाइयों और उन दूसरे कामगारों को फायदा हो सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये महीने की है। इसके लिए 18 साल की उम्र से काम शुरू करने वाले किसी वर्कर को 20-25 साल के काम के दौरान मामूली मासिक अंशदान करना होगा और इस स्कीम के लिए उतना ही अंशदान केंद्र की ओर से आएगा।

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एक आंकड़े के मुताबिक भारत में करीब 50 करोड़ की वर्कफोर्स है जिसमें से 90 % हिस्सा असंगठित क्षेत्र में काम करता है। ऐसे वर्कर्स को साधारणतः सरकारों की तरफ से तय न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता और न ही पेंशन या हेल्थ इंश्योरेंस जैसी सोशल सिक्यॉरिटी मिल पाती है।

अब चूंकि 15000 रुपये महीने से ज्यादा सैलरी वाले लोग एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन या एंप्लॉयीज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन के तहत कवर्ड हैं, इसलिए फ़िलहाल पहले चरण में उन्हें प्रस्तावित स्कीम के दायरे से बाहर रखा जाएगा।

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