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अब वाईफाई सिगनलों से उत्पन्न होगी बिजली, बिना बैटरी के चार्ज हो सकेंगे उपकरण

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अमेरिका के मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी छोटी-सी मशीन निजात की है, जो वाईफाई सिगनलों को बिजली में बदल देगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस डिवाईस की मदद से बिना बैटरी के ही किसी भी उपकरण को चार्ज किया जा सकेगा। इस मशीन का नाम रेक्टेना है। यह डिवाइस वाईफाई सिगनलों में मौजूद अल्टरनेटिंग करंट को डायरेक्ट करंट में बदल सकता है।

ऐसे करेगा काम

रेक्टेना डिवाइस वाईफाई में मौजूद इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों को रेडियो-फ्रीक्वेंसी एंटेना की सहायता से ऐसी तरंगों के रूप में पकड़ता है। ये टू-डायमेंशनल सेमीकंडक्टर से जुड़ा होता है, जो काफी लचीला होता है। इसके बाद वाईफाई एसी वेव्स सेमीकंडक्टर में चली जाती हैं और डीसी वोल्टेज में बदल जाती हैं। इस डिवाइस की मदद से इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और बैटरी को चार्ज करने का उपयोग में लाया जाता है।
रिसर्चर ने बताया कि एसी करंट को डीसी करंट में बदलने के लिए रेक्टिफायर की आवश्यकता होती है। यह मोलिबडेनम डीसल्फाइड (MoS2) रेक्टिफायर से बनाया गया, जो बहुत पतला और लचीला है।

वाईफाई सिगनल का जितना इनपुट उसका 30% आउटपुट मिलेगा

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वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्होंने जब MoS2 से बनी इस डिवाइस का परीक्षण किया तो उन्होंने पाया कि 150 माइक्रोवॉट के वाईफाई सिगनल से लगभग 40 माइक्रोवॉट की बिजली पैदा हुई और इतनी बिजली मोबाइल के डिस्प्ले और सिलिकॉन चिप के लिए काफी है। यानी कि वाईफाई सिगनल का जितना इनपुट होगा, उसके बदले 30% तक आउटपुट प्राप्त होगा।

रिसर्च के मुताबिक, पहले जो रेक्टिफायर बने थे वह कम फ्रीक्वेंसी पर काम नहीं करते थे। इस वजह से इन रेक्टिफायरों में मोबाइल फोन वाई-फाई सिग्नल से निकलने वाली गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी को कैच करने की क्षमता नहीं थी। लेकिन जो नया रेक्टिफायर बना है, वह 10 गीगाहर्ट्ज तक की फ्रीक्वेंसी को भी बिजली में बदलने की क्षमता रखता है।

मेडिकल डिवाइस में भी किया जा सकता है उपयोग
मेड्रिड की टेक्निकल यूनिवर्सिटी में रिसर्चर और इस स्टडी के को-ऑथर जीसस ग्रेजल ने अपने बयान में बताया कि इस डिवाइस का उपयोग मेडिकल डिवाइस के रूप में भी किया जा सकता है। जीसस ग्रेजल के मुताबिक, मेडिकल डिवाइस में बैटरी लगी होती है इसलिए आप इनका इस्तेमाल नहीं कर सकते, क्योंकि इससे इससे लिथियम लीक होता है, जिससे पेशेंट की जान जा सकती है। लेकिन MoS2 से लिथियम लीक नहीं होता। इस वजह से इनका उपयोग मेडिकल डिवाइस में भी हो सकता है.

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