Loading...

50 साल से अपनी 50 एकड़ जमीन पर 175 गाय-बैल पाल रहे गौ सेवक शेख शब्बीर मामू, अब मिलेगा ये बड़ा पुरस्कार

0 12

पिछले 50 साल से बिना किसी स्वार्थ के गौ सेवा कर रहे महाराष्ट्र के गौ-सेवक शेख शब्बीर मामू का नाम 25 जनवरी की रात जारी पद्म अवार्ड की सूची में आया है। जी हां, शब्बीर अपनी 50 एकड़ जमीन पर 175 गाय-बैल के लिए चारा उगाते हैं। जब ये मात्र 10 साल की उम्र के थे तब इन्होंने अपने पिता का स्लॉटर हाउस बंद कराया और गौ-सेवा में जुट गए। बता दें कि शब्बीर का पूरा परिवार गौ-सेवा करता है।

चलिए जानते हैं इनसे जुड़ी कुछ ख़ास बातें

खेतीबाड़ी नहीं बस करते हैं तो गौ-सेवा

एक छोटे से कस्बे में रहने वाले शेख शब्बीर मामू पद्मश्री पुरस्कार की सूची में नाम आने के बाद से काफी प्रचलित हो गए हैं। उन्हें गौ-सेवा के लिए पद्मश्री से नवाजा जा रहा है।

Loading...

हालांकि शब्बीर को नहीं पता कि उन्हें कौन-सा पुरस्कार दिया जा रहा है। कभी उन्होंने इसके बारे में सुना भी नहीं था। वे कहते हैं उन्होंने सिर्फ बिना किसी स्वार्थ के गौ-सेवा की है।

10 साल की उम्र में पिता से बंद कराया स्लॉटर हॉउस

शेख शब्बीर के अनुसार उनके पिता का कत्लखाना था। 10 साल की उम्र में उन्होंने कई जानवरों उसमें कटते देखा था। इसका उन पर काफी गहरा असर पड़ा। उन्होंने पिता से कत्तलखाना बंद करवाया। इसके बाद खुद 10 गायें लेकर आए और उन्हें पालने में लग गए।

स्वयं करते हैं गाय के बच्चों की देखभाल

बता दें कि जब किसी गाय को बच्चा होता है तो उसकी देखभाल खुद शब्बीर करते हैं। वे इन गायों का गोबर बेचकर अपना घर चलाते हैं।

उन्होंने बताया कि कभी किसी बैल को बेचने की नौबत आए तो खरीददार से लिखकर लेते हैं कि अगर बैल बीमार पड़ता है या फिर काम करने लायक नहीं रहता तो वह वापस उनके पास लाएंगे। उसकी जितनी कीमत होगी, चुका दी जाएगी पर उसे कत्लखाने में नहीं भेजा जाएगा।

पूरा परिवार करता है गौ-सेवा, लोग करते हैं मदद

इसमें तो कोई दो राय नहीं कि 175 मवेशी पालना आसान नहीं है। हालांकि शब्बीर बताते हैं कि कई लोग उनकी मदद करने समय-समय पर आगे आते रहे हैं।

उनके परिवार में दो बच्चे और बहुएं हैं। वे भी शब्बीर की राह पर ही चलते हैं। शब्बीर के बेटे कहते हैं कि हमने पिता से सीखा है कि गौ-सेवा में ही सुकून है। हम पिता का ये काम आगे भी जारी रखेंगे।

Loading...

Leave A Reply

Your email address will not be published.