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मोदी सरकार लोगों को अब ऐसे घर बैठे देगी तनख्वाह, दो दिन बाद बजट में हो सकता है इसका ऐलान

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1 फरवरी 2019 में अब दो दिन शेष हैं। ऐसे में सबकी निगाहें इस बार के अंतरिम बजट पर टिकी हुई हैं। हर बार की तरह एक बार फिर माध्यम वर्ग और किसानों और साथ ही बेरोजगारों को इस बजट से उम्मीदें हैं। चूंकि इसके बाद लोकसभा चुनाव हैं तो आम चुनावों से पूर्व ये मोदी सरकार का आखिरी बजट है इसलिए ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं ये बजट में सभी के लिए कुछ न कुछ खास हो सकता है।

9.8 बिलियन डॉलर खर्च कर सकती है सरकार

चर्चित ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार किसानों को खुश करने के लिए 70 हजार करोड़ रुपये यानि 9.8 बिलियन डॉलर की राशि को खर्च करने का एलान कर सकती है।

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खाते में सीधा आएगी एकमुश्त रकम

माना जा रहा है कि सरकार सभी तरह के किसानों, बेरोजगारों एवं गरीब लोगों को एकमुश्त 30 हजार रुपये की मदद देने का एलान कर सकती है। यह रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।

सब्सिडी होगी खत्म

माना तो ये भी जा रहा है कि इस स्कीम के लागू होने के बाद लोगों को राशन और एलपीजी सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा नहीं मिलेगा।

कितनी राशि की हो सकती है मदद

सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार प्रति एकड़ 4 हजार से लेकर के 12 हजार रुपये की राशि की मदद दे सकती है। हालांकि कई लोगों का मानना है कि यह राशि 30 हजार रुपये सालाना भी हो सकती है।

चूंकि भारी भरकम राशि शामिल है इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि इस संबंध में अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में होगा।

सूत्रों के अनुसार समय पर फसल ऋण चुकाने वाले किसानों का ब्याज माफ करने की भी चर्चा हो सकती है। हालांकि इससे सरकारी खजाने पर एक्स्ट्रा 15 हज़ार करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

बीमा पॉलिसी का प्रीमियम माफ़ किया जा सकता है

फसलों के लिए बीमा पॉलिसी लेने वालों किसानों के लिए पूरी तरह से प्रीमियम माफ करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। जी हां, और सरकार भी इस संबंध में तेलंगाना और ओडिशा सरकारों द्वारा अपनाई गई योजनाओं की गहन समीक्षा करने में लगी हुई है।

तेलंगाना की ये स्कीम अपना सकती है सरकार

मालूम हो कि देश की 47 % आबादी किसानी से जुड़ी है। ऐसे में सरकार तेलंगाना के ‘रितु बंधू स्कीम’ को अपनाने के बारे में सोच रही है जहां 1 एकड़ से कम जमीन रखने वाले किसानों को 4 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से डायरेक्ट खाते में पैसे मिलते हैं. ये पैसे दोनों फसलों के सीजन- रबी और खरीफ में मिलते हैं.

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