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मोदी सरकार ने रोकी उनके काम की कमी निकालने वाली रिपोर्ट, सदस्यों ने सरकार के इस रवैये पर दिया इस्तीफा

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मोदी सरकार के मंत्रालयों से एक चौकाने वाली खबर आई है. जी हां, दरअसल एक आरोप के मुताबिक मोदी सरकार ने नेशनल सैंपल सर्वे आॅर्गनाइजेशन यानि कि NSSO द्वारा वित्त वर्ष 2017—18 के लिए रोजगार और बेरोजगारी पर सालाना सर्वे जारी नहीं होने दिया. अब इसके विरोध में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग यानि कि NSC के एक्टिंग चेयरपरसन सहित 2 सदस्यों ने इस्तीफा भी दे दिया है.

दरअसल उन्होंने यह आरोप लगाया कि सरकार की ओर से आयोग की अनदेखी की जा रही है. यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस सरकार में यह NSSO की यह पहली रिपोर्ट थी. सूत्रों की माने तो कहा जा रहा है कि इस सालाना रिपोर्ट में नोटबंदी के बाद बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरियां गंवाने का जिक्र था.

दरअसल NSC एक आटोनॉमस बॉडी है, जिसका गठन वर्ष 2006 में हुआ था. मालूम हो कि NSC का काम देश के स्टैटीस्टिकल सिस्टम के फंक्शन का रिव्यू करना और मॉनिटर करना है. अब ऐसे में NSC के एक्टिंग चेयरपरसन सहित 2 सदस्यों इस्तीफे के बाद सरकार पर विपक्ष ने निशाना भी साधना शुरू कर दिया है.

2 महीने बाद नहीं जारी हुई रिपोर्ट

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NSC के एक्टिंग चेयरपरसन पीसी मोहन का इस संबंध में एक बयान आया है. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि NSSO अपनी फाइंडिंग NSC के पास भेजता है. आयोग के मंजूरी देने के कुछ दिनों बाद रिपोर्ट जारी की जाती है.

पीसी मोहन ने कहा कि हमारी ओर से NSSO की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी गई थी. इस रिपोर्ट में बेरोजगारी का जिक्र किया गया था. लेकिन इसके 2 महीने बाद भी रिपोर्ट जारी नहीं हुई.

सरकार नहीं ले रही गंभीरता से

पीसी मोहन के मुताबिक कुछ दिनों से हमें यह महसूस हो रहा था कि सरकार राष्ट्री सांख्यिकी आयोग को गंभीरता से नहीं ले रही है. जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाना होता था, NSC को दूर ही रखा जाता था.

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